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एक दलाल जो चित्रकार बन गया

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एक दलाल जो चित्रकार बन गया – दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जो दुनियावी आईने से जरुर सफल नजर आते है लेकिन असल में वो नहीं है क्योंकि अक्सर हमे अपने परिवार और अपनों की बहुत सी उम्मीदों का बोझ ढोना पड़ता है जो हमारी रचनात्मकता और हमारी दिशा जो हम में सहज भाव से होती है उसे भटका देता है और हम उनकी उम्मीदों को पूरा करने में बेशक सफल भी हो जाएँ तो भी जिन्दगी में एक मोड़ पर हमे अहसास होता है कि हम क्यों यंहा है जन्हा हमे नहीं होना चाहिए था जबकि थोड़ी चेतना से अगर आप काम लें तो शायद कुछ बेहतर हो पाता | यही वो है जो हम जिन्दगी भर जिसकी कमी महसूस करते है और कभी कोई ऐसा भी होता है जो इस से भी पार पा लेता है जैसे इस कहानी में हुआ बड़ी बेहतरीन कहानी है जिसे ओशो जिन सूत्र प्रव . 59 में मेने पढ़ा है |

एक आदमी चालीस साल तक लंदन के बाजार में दलाली का काम करता रहा और सामाजिक तौर पर लोग जिस नजरिये से किसी की सफलता को आंकते है उन मायनो में वो सफल भी था क्योकि सभी तरह के सुविधा के साधन उसके पास थे धन -दौलत , एक सुंदर पत्नी भी |एक रात एकाएक वो घर से गायब हो गया | कुछ पता नहीं चला | जानने वाले भरोसा नहीं कर पाए कि आखिर गया कंहा होगा क्योकि न तो उसका कोई प्रेम प्रसंग था जो सोचे कि किसी लड़की के साथ भाग गया हो  और न ही कोई धार्मिक रुझान कि कंही ये भी मान लें कि सन्यासी हो गया हो |

कुछ सालों बाद पता चला वो आदमी पेरिस में चित्रकला सीख रहा था और भिखारियों जेसी हालत हो गयी थी | सब परिवार वाले उस से मिलने भागे | मिलने वालों ने हेरानी से सवाल किया ये क्या तुम ये क्या कर रहे हो तुम्हारे पास सब कुछ तो था फिर इसकी क्या जरुरत तो उसने कहा यही तो समस्या है कि सब ठीक ही था लेकिन जीवन में कोई उमंग नहीं थी न ही कोई नयापन | जीवन में हमेशा से इच्छा थी कि चित्रकार बनू | दलाल बनने की चाह मेने नहीं रखी जबकि सफलता मात्र एक संयोग था और ये हो गया | मैं अब खुश हूँ बेशक मेरे पास पहनने को अच्छे कपडे नहीं है और न ही रहने को कोई घर | एक मित्र के यंहा रहता हूँ और चित्र बनाता हूँ बिक जाते है तो खाने पीने लायक पेसे आ जाते है |मेरी पत्नी से कहना मुझे किसी से नाराजगी नहीं है और भले ही जिन्दगी में सब ठीक था लेकिन ठीक से कुछ नहीं होता जिन्दगी में कुछ अधिक चाहिए होता है | ऐसे तो ठीक ठीक ठीक और हम सुविधापूर्ण जी लिए और जिन्दगी खत्म  कुछ ऐसा नहीं जो नया हो |

वो वापिस नहीं लौटा और एक दिन बड़ा चित्रकार बन गया |