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Ab Pyar Me Wo Nyapan Kanha Hindi Poem -अब प्यार में वो नयापन कंहा ??

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Ab Pyar Me Wo Nyapan Knha – जिन्दगी में कभी कभी चीज़े हमसे ऐसे पेश आती है कि हमे सब कुछ सहते हुए भी छोड़कर आगे बढ़ना होता है पुराने चेहरे हम भुला देना चाहते है  और जब किसी खास मुकाम को हासिल कर लेते है तो जैसे वही चीज़े घूम घामकर वापिस हमारे सामने आकर खड़ी हो जाती है । प्यार में इसे बेबसी कहते है और ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ । ऐसे में हमारे पास कुछ अधिक विकल्प नहीं होते । चाहकर भी हम कुछ खास नहीं कर सकते । आज मुझे उसका कॉल आया और कुछ यादें और पुराने लम्हे ताजा हो गयी । आज की एक फ़ोन कॉल की भावनाओं को दर्शाती मेरी कुछ पंक्तियाँ

ये एक फ़ोन कॉल था ,
याद दिला गया उन लम्हों की
स्कूली दिनों की आशिकी का
जब मन पर पूरा जोर था ,
जानी पहचानी आवाज को
आज भी पहचानते देर न लगी
अब वो वक़्त नहीं रहा फिर भी
वो आवाज आज भी अपनी सी लगी
कहने लगी ‘कमल’ कैसे हो तुम
अब याद तो मुझे करते ही होवोगे
जानती हूँ ये लम्बा वक़्त था इन्तजार का
फिर भी यादे पुरानी संजोते ही होवोगे
मैंने कहा क्या कहूँ अब तुमसे
कहने को मेरे पास शब्द ही नहीं
बड़े जतन से दिन बीते वो मेरे कि
अब लगता है याद करने की बस जरुरत नहीं
अब तो आदी हूँ इस अकेलेपन का
कहने को अब ये भी मुझे भाता है
भरोसा रह नहीं गया प्यार पर मुझे
अकेले जीना भी तो मुझे आता है
कहने लगी ताने छोड़ो ये बताओ
अब भी प्यार करते हो कि नहीं ?
मैंने भी बड़ी बेफिक्री से कहा
अब फर्क भी क्या पड़ता है न तुम्हे न मुझे
अब मन में वो आवारगी वो दीवानगी कंहा ?
सब बह गया जब तुम लौटकर आई हो
अब प्यार में वो नयापन कंहा ??

कमल अग्रवाल
‪#‎pooja‬ ‪#‎Mrk‬

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Pyar Me Wo Nyapan Kanha (2)
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