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एक अरसे बाद …

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एक अरसे बाद
उसी मोड़ पर मिली वो मुझे
जंहा से हसीन शुरुआत थी
और तभी से हर लम्हा
हर पल मेरे साथ थी ‪#‎tum‬
कहने लगी कितने अजीब हो तुम
आज भी उतने ही आधे अधूरे हो तुम
कहने लगी यू ही
कोई अफसाना कोई कहानी
आसानी से पूरी नहीं होती
ये जो मजबूरियां और
दूरियां ही तो है
नहीं तो ख्वाहिशे और
मैं भी यूँ अधूरी नहीं होती
मैंने कहा दीवानों सा हाल
मेरा तुमसे ही तो आया है
तुम्ही में खुद को मेने पाया है
क्योकि मैं तो खुश था
उस बेमतलब
सी जिन्दगी में ही
तुम्ही ने तो जिन्दगी में रंग भरना सिखाया है
काश तुम समझती और जानती
मेरे लिए एकादशी का चाँद भी पूरा होता ।
‪#‎pgli‬ तुम एक बार हाँ तो कहती तो जान जाती
कि ये अधूरा भी कितना पूरा होता |

कमल अग्रवाल