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सबकी उपयोगिता और भिन्न विचार -All religion in hindi

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All religion in hindi – चन्दनपुर का राजा बड़ा दानी और प्रतापी था | उसके राज में सभी लोग व प्रजा बड़े खुशहाल तरीके से जीवनयापन कर रहे थे | एक बार राजा ने सभी धर्मो के उपदेशकों को आमंत्रित किया और एक विशाल कमरे में सभी का एक साथ रहने का प्रबंध कर दिया और कहा कि अब आप लोग कुछ दिनों तक सभी एक साथ रहोगे और आपस में विभिन्न धर्मो और दर्शनों पर विचार विमर्श करोगे | जब आप सभी एक विचार एकमत हो जायेंगे तो मैं आप सब को ढेर सारे उपहार देकर यंहा से विदा करूँगा | ऐसा कहकर राजा चला गया |

काफी दिन बीत जाने पर भी उनमे से कोई भी आपस में एकमत नहीं हुआ | पड़ोस के राज्य में भी ये बात फ़ैल गयी जन्हा एक पहुंचे हुए सिद्ध महात्मा रहते थे उन्हें ये बात पता चली तो वो राजा के दरबार में आये तो उन्होंने राजा से कहा मैंने सुना है ” तुम बहुत दानी हो क्या तुम मुझे भी दान दोगे ?” इस पर राजा ने कहा “क्यों नहीं ,बताईये आपको क्या चाहिए ?” महात्मा ने कहा मुझे तेरे अनाज के गोदाम में से कुछ अनाज चाहिए | राजा उन्हें गोदाम तक ले गया तो महात्मा ने कहा यंहा तो कई तरह के अनाज रखे है ,तुम इन सबकी जगह कोई एक ही अनाज क्यों नहीं रखते | राजा को हेरानी हुए तो राजा ने कहा यह कैसे संभव है अगर मैं गेंहू चावल दाल की जगह केवल एक ही अनाज रखूं तो हम अलग अलग स्वाद और पोषण का भोजन केसे कर पाएंगे | जब प्रकृति ने हमे इतनी सारे तरह के अनाज दिए है तो एक ही तरह के अनाज को रखना कन्हा की बुद्धिमानी है ?

महात्मा ने कहा बिलकुल सही कहा राजन ! जब तुम सभी अनाजो की उपयोगिता एक से नहीं बदल सकते तो तुम भला सभी धर्मो और विचारो को एक तरह के विचारो से कैसे बदल सकते हो | सबकी अलग अलग उपयोगिता है वो समय समय पर सबका मार्गदर्शन करते है | महात्मा ने अपनी बात पूरी की और राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ उसने कक्ष में बंद सभी विचारको और उपदेशको से क्षमा मांगते हुए उन्हें उपहार देकर विदा कर दिया |