Home Short Stories अपनों की चोट और लोहे का कण -Apno ka dard hindi story

अपनों की चोट और लोहे का कण -Apno ka dard hindi story

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Apno ka dard hindi story – एक सुनार था और उसी के पास में एक लुहार की दुकान भी थी | सुनार जब काम करता था तो उसकी दुकान से बहुत ही धीमी आवाज होती थी लेकिन जब लुहार काम करता था तो उसकी दुकान से कान के परदे फाड़ देने वाली आवाज आती थी | एक बार की बात है एक सुनार एक दिन काम कर रहा था तो सोने के एक कण छिटक कर दुकान के बाहर आ गिरा और उधर से लोहे का एक कण भी बाहर आ गिरा | दोनों आपस में बाते करने लगे |

सोने के कण ने लोहे के कण से कहा भाई हम दोनों का दुःख समान है हम दोनों को एक ही आग में तपाया जाता है और समान रूप से एक जेसे हथोड़े से पीटा जाता है | मैं ये सब यातना चुपचाप सहन करता हूँ पर तुम तो शोर मचा देते हो ?? लोहे का कण कहने लगा तुम्हारा कहना सही है  पर तुम पर चोट करने वाला हथोडा तुम्हारा सगा भाई नहीं है न पर मुझ पर वार करने वाला हथोडा मेरा सगा भाई है | फिर कुछ रूककर बोला कि असल में परायों की चोट से उतनी पीड़ा नहीं होती जितनी अपनों की चोट से होती है और वह अधिक असहनीय होती है इसी लिए मैं जब जब हथोडा पड़ता है तो चीख उठता हूँ दर्द से |