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Arundhati bhattacharya success story in hindi

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Arundhati bhattacharya success story महिलाओं के लिए बहुत प्रेरणा दायक है कोलकाता में पैदा हुई Arundhati bhattacharya स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की पहली महिला चेयरपर्सन है । उन्होंने यह पद सात अक्टूबर 2013 को ज्वाइन किया था उन्होंने 1977 में PO के पद पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को ज्वाइन किया था और अपने 36 साल के करियर में वो बैंक के कई विभागों के काम कर चुकी है । Arundhati bhattacharya स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के न्यूयार्क स्थित ऑफिस में भी काम कर चुकी है और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया कैपिटल मार्केट्स में वो मैनेजिंग डायरेक्टर भी रह चुकी है ।

फ़ोर्ब्स पत्रिका ने 2014 में उनको दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में 36वे नंबर पर स्थान दिया था Arundhati bhattacharya भारत की पहली और एकमात्र ऐसी महिला है जो फार्च्यून की फर्स्ट 500 में आने वाली किसी भारतीय कम्पनी का परतिनिधित्व करती है । Arundhati bhattacharya ने मोबाइल बैंकिंग और अन्य बेकिंग सुविधाओं को साकार करने में काफी योगदान दिया है ।

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पारिवारिक पृष्ठभूमि – Arundhati bhattacharya का मानना है कि दैनिक जीवन में आने वाली कई चुनोतिया जो है वो आपकी प्रगति में मदद करती है उनके पिता भिलाई के स्टील प्लांट में काम करते थे  और माँ होम्योपेथी कंसलटेंट थी उन्होंने अपनी स्कूल की पढाई बोकारो से की है और ग्रेजुएशन करने के लिए वो कोलकाता चली गयी ।

Arundhati bhattacharya के अनुसार जिन्दगी में सफलता का कोई भी शॉर्टकट नहीं होता बस आपको ईमानदारी और मेहनत के साथ काम करना होता है और अपनी नौकरी को कभी भी नार्मल वे में नहीं लेकर हमेशा कुछ न कुछ क्रिएटिव करने की कोशिश करते रहना चाहिए और कभी भी जीवन में आने वाली चुनोतियों के लिए हर नहीं माने और अगर आपके लक्ष्य बड़े है तो मेहनत भी बड़ी ही करनी होगी इसलिए कोई भी विकल्प तलाशने की जगह आपको मेहनत और आने वाली चुनोतियों पर ध्यान देना चाहिए ।