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जैसा संग वेसा रंग – bad company story in hindi

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Bad company story in hindi : रामदास का एक ही पुत्र था जिसका नाम रवि था और रामदास अपने बेटे को बहुत चाहता था इसलिए उसे हर वो चीज़ लाकर दे देता था जिसके लिए उसका बेटा एक बार उसे कह देता |सिर्फ वो नहीं बल्कि रवि की माँ भी उसे बहुत प्यार करती थी | वह उसे माखन मलाई खिलाकर खुश करती थी लेकिन रवि को इन सबकी कोई क़द्र नहीं थी | क्योंकि वह बुरी संगत में पड़ गया था | जुआ खेलना और अपने आवारा दोस्तों के साथ बाहर घूमना और आवारागर्दी करना यही उसकी आदत में शुमार हो गया था |

माता पिता ने बहुत समझाया किन्तु रवि को कुछ भी फर्क नही पड़ा | तब उसके पिता ने उसे समझाने का एक उपाय सोचा और रवि से कहा जाकर बाजार से कुछ सेब खरीद लाओ और उसे पैसे दे दिए रवि जाकर बाजार से अच्छे अच्छे सात सेब खरीद लाया | इस पर उसके पिता ने उसे कुछ रूपये और देकर कहा अब जाओ एक सडा गला सेब खरीद के ले आओ |

रवि एक सडा हुआ सेब खरीद लाया परन्तु वह चकित था कि पिता ने उस से ये सडा हुआ सेब आखिर क्यों मंगवाया है | पिता की आज्ञा से रवि ने सारे सेब एक टोकरी ने रख दिया | पिता के कहने से रवि ने सडा हुआ सेब भी अच्छे सेबों के बीच में रख दिया | और उस से बोला कि अब ये टोकरी जाकर अंदर रख दो हम कल सवेरे ये सेब खायेंगे तो अगले दिन जब वो लोग भोजन कर चुके तो रवि के पिता ने रवि से कहा जाओ कल वाले सेब ले आओ हम खाते है तो जब रवि सेब लेने गया तो हेरान हो गया देखता है कि सारे सेब सड़ गये है उसने पिता से यह बात कह दी तो पिता ने उसे समझाया |

पिता ने कहा कि देखो जिस तरह ये सेब केवल एक सडे हुए सेब की वजह से केवल एक ही रात में सड़ गये है उसी तेजी से बुरी सगत में होने पर इन्सान के साथ होता है तुमने खुद देखा न बुरी संगत से कितनी हानि होती है | रवि पिता का आशय समझ गया था उसने अब कसम खा ली कि अब कभी भी वह बुरी संगति में नहीं बैठेगा |