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नहीं ली गाली – child abuse hindi story

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child abuse hindi story -एक लड़का बड़ा ही दुष्ट प्रवृति का था इसके साथ ही उसे गालियाँ देने की बहुत बुरी आदत थी | वह जिसको चाहता उसी को गाली देकर भाग खड़ा होता | एक दिन एक साधू एक पेड़ के नीचे बैठ कर साधना कर रहे थे तो लड़का उन्हें सताने की नियत से उनके पास आया और उनके सामने उन्हें गाली देने लगा और सोचने लगा कि सब ये साधू मेरे पीछे दौड़ेगा और मुझे मारने के लिए भागेगा | बड़ा मज़ा आयेगा |

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ साधू ऐसे बैठे रहे जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं हो | वो अपनी साधना में लीन बैठे रहे | इस प्रकार लड़के को चिढ होने लगी कि इस पर तो कुछ भी फर्क नहीं पड़ा तो वह और भी जोर जोर से गालियाँ बकने लगा | साधू ने कुछ भी नहीं कहा और शांत बैठे रहे |

इस पर एक अन्य लड़का जो ये सब देख रहा था साधू के पास आया और बोला कि बाबाजी ये आपको गालियाँ दिए जा रहा है और चुपचाप बैठे है इस पर साधू ने कहा कि बेटा इसमें कौनसी बड़ी बात है मुझे दुःख क्यों होगा क्योंकि मैंने गालियाँ ली ही नहीं है | इस पर वह युवक बोला कि लेकिन फिर भी यह कितनी गन्दी गन्दी गालियाँ दे रहा है आपको बुरा नहीं लगता क्या ?

साधू ने कहा देखो इसकी दी हुई गालियाँ मैंने नहीं ली है इसलिए वो इसी के पास चली गयी है और जितनी गन्दी गालियाँ है उनसे इसी के मुख का नाश हो रहा है इसी से वो गालियाँ चिपकी हुई है मैं दुखी होता अगर मैं वो गालियाँ लेता तो इस पर जो लड़का गालियाँ दे रहा था सोचने लगा कि साधू सच ही तो कह रहे है मेरी दी हुई गालियाँ मेरे पास ही है और मेरा ही नाश हो रहा है लोग जो तिलमिलाते हुए मेरे पीछे भागते है वो गालियाँ लेते है इसलिए भागते है लेकिन साधू ने गालियाँ नहीं ली तो मैं ही अशुद्ध हो रहा हूँ मैं सच में पाप का भागी हूँ | इस तरह उस युवक को अपनी गलती का अहसास हुआ और वो सुधर गया |

moral: इन्सान को अभद्र भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए |