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सारस और कछुवा – Cranes and terrapin hindi story

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Cranes and terrapin hindi story -एक तालाब में एक सारसों का जोड़ा रहता था तो उसी तालाब में रहने वाले कछुवे से उनकी अच्छी दोस्ती हो गयी |सारस सुबह होने के बाद आसमान में उड़ जाते और फिर देर रात को वापिस आते उन्हें जाते देख कछुवे का भी बड़ा मन होता था आसमान देखने का इसलिए तो मन में बहुत बार ये विचार करता कि काश मैं किसी तरह उड़ पाता तो मैं भी आसमान को देखता |

एक दिन उसने अपने मन की बात अपने सारस मित्रो से कह दी तो सारसों ने कहा मित्र तुम कैसे उड़ सकते हो क्योंकि तुम्हारे तो पंख नहीं है इसलिए उड़ पाना बेहद मुश्किल है तुम नहीं उड़ पाओगे | तो कछुवा उदास हो गया और थोड़ी देर सोचकर फिर बोला कि यार कुछ तो रास्ता होगा तुम मेरे लिए निकालो कि  मैं भी आसमान देख सकू|

अपने मित्र की इतनी तीव्र इच्छा देखकर सारसों ने भी कुछ युक्ति के बारे में सोचा तो कुछ दिनों बाद वो अचानक आये और बोले मित्र हमने तुम्हारे लिए एक उपाय सोच लिया है अब तुम्हे भी आज हम आसमान की सैर कराते है कहकर उन्होंने एक लम्बी मजबूत छड़ी को दिखाकर कहा हम इसे अपने मुह में पकड़ लेंगे और तुम भी कसकर इसे अपने मुह से पकड़ लेना फिर हम उड़ान भरेंगे और तुम भी हमारे साथ उड़ जाओगे कहकर उन्होंने उड़ने की तैयारी की कछुवे ने उनके बताये अनुसार छड़ी को पकड़ा और वो दोनों सारस उड़ चले |

कछुवा अपने बाकि के साथ के कछुवो के सामने उड़ते हुए घमंड से भर गया और सारस उड़ते गये और वो हरे भरे मैदानों और जगलों आदि को पार करके बहुत देर तक उड़ते रहे | कछुवे ने ये सब पहली बात देखा था तो मंत्रमुग्ध हो गया और ये विचार भूल गया कि वो उड़ नहीं सकता है इसलिए भ्रम में आकर उसने उड़ने की कोशिश करने के लिए जैसे ही अपना मुह खोला और हाथ पैर चलाये तो छड़ी की पकड़ उस से छूट गयी और वो बहुत ऊंचे से नीचे आ गिरा और गिरते ही उसके प्राण पखेरू उड़ गये |

सच ही कहा गया है अपनी शक्तियों और सीमायों को नहीं पहचानने का परिणाम बहुत बुरा होता है |