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क्यूरेटिव पिटीशन क्या है जानिए इसके बारे में

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Curative Petition एक ऐसी टर्म है जो न्यायालय और कानून की भाषा में काम में आती है और यह कोई पुरानी term नहीं है क्योंकि यह संविधान से नहीं आती है बल्कि न्याय प्रणाली में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गये एक फैसले के दौरान इस तरह की अवधारणा को रखा गया जिसमे  न्याय के आदेश को ग़लत क्रियान्वन से बचाने के लिए या फिर उसे दुरुस्त करने लिए क्यूरेटिव पिटीशन की धारणा को शुरू किया गया ताकि शीर्ष कोर्ट से किसी भी तरह की गलती होने की गुंजाईश कम से कम हो जाये तो चलिए क्यूरेटिव पिटीशन के बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करते है –

Curative Petition information in hindi

Curative Petition असल में जब किसी किसी व्यक्ति को मौत की सजा सुना दी जाती है वो उसके पास विकल्प होता है कि वो अपनी सजा में नरमी की गुहार लगाने के लिए राष्ट्रपति को अपनी दया याचिका भेज सकता है या सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका को दायर कर सकता है लेकिन किसी भी वजह से अगर राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है तो उसके पास केवल एक ही रास्ता होता है सजा में नरमी के लिए गुहार लगाने का कि वो Curative Petition दायर कर सकता है | इसलिए हम ये कह सकते है कि न्याय प्रणाली में केवल Curative Petition ही अंतिम रास्ता होता है जिसके जरिये मुजरिम अपनी सजा में कमी के लिए अप्रोच कर सकता है और अगर यह भी ख़ारिज हो जाती है तो फिर उसके लिए सभी रास्ते बंद हो जाते है |curative petition information in hindi

आमतौर पर यह होता है कि राष्ट्रपति की दया याचिका ख़ारिज करने के बाद कोई भी मामला ख़त्म हो जाता है लेकिन कुछ मामलों में अपवाद स्वरुप यह होता है कि कोर्ट  दया याचिका खारिज करने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई करने की मांग स्वीकार कर सकता है जैसे कि याकूब मेमन के मामले में हुआ | curative petition की अवधारणा साल 2002 में रुपा अशोक हुरा मामले की सुनवाई के दौरान हुई जिसमे सुनवाई के दौरान यह पूछा गया कि क्या ऐसा हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद किसी आरोपी को राहत मिल सकती हो ? नियम के मुताबिक ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति रिव्यू पिटीशन डाल सकता है लेकिन सवाल ये पूछा गया कि अगर रिव्यू पिटीशन भी खारिज कर दिया जाता है तो क्या किया जाए? तब सुप्रीम कोर्ट अपने ही द्वारा दिए गए न्याय के आदेश को ग़लत क्रियान्वन से बचाने के लिए या फिर उसे दुरुस्त करने लिए curative petition की धारणा लेकर सामने आयी। जिसके जरिये सुप्रीम कोर्ट अपने ही द्वारा दिए गये फैसलों पर पुनर्विचार के लिए राजी हो गयी |

Curative petition rules / क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने से जुड़े नियम –

क्यूरेटिव पिटीशन को फाइल करने से जुड़े भी कुछ नियम है जिन्हें याचिकाकर्ता को follow करना पड़ता है जैसे कि उसे यह बताना पड़ता है कि वह किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे रहा है साथ ही यह petition किसी न किसी सीनियर वकील के द्वारा के द्वारा सर्टिफाइड होना चाहिए | उसके बाद होता ये है कि petition को सुप्रीम कोर्ट के तीन मोस्ट सीनियर जज जो होते है उनके पास और जिन जजों ने फेसला सुनाया है उनके पास भी इसे भेजा जाना होता है इसके बाद अगर बेंच के अधिकतर सदस्य इस बात से सहमत होते है कि यह होना चाहिए तो फिर उन्ही जजों के पास याचिका को पुनर्विचार और सुनवाई के लिये भेज दिया जाता है |

तो ये है Curative Petition information in hindi और इस बारे में अधिक जानकारी या सलाह के लिए आप हमे ईमेल कर सकते है और हमसे hindi updates पाने के लिए आप हमे फेसबुक पर फॉलो कर सकते है या फिर नीचे दिए गये घंटे के निशान पर भी क्लिक कर सकते है |

Image Source – demo pic