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तोड़ो नहीं जोड़ो एक डाकू की कहानी -Daku story in hindi

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Daku story in hindi -अंगुलिमाल नाम न एक बहुत बड़ा डाकू था |वह लोगो को मारकर उनकी उँगलियाँ काट लेता था और फिर उनकी माला बना`कर उसे गले में पहनता था | इसलिए लोगो ने उसका नाम यही रख दिया |लोगो को लूट लेना और उनकी जान ले लेना उसके और उसके आदमियों का बाएं हाथ का खेल था | लोग उस से डरते थे और उसका नाम लेने से लोगो को प्राण सूख जाते थे |

एक बार भगवान् बुद्ध उधर से होकर निकले उपदेश देते हुए वो लोगो के पास पहुंचे तो उन्हें लोगो ने कहा आप यंहा से चले जाएँ क्योंकि आप यंहा सुरक्षित नहीं है यंहा एक डाकू है जो किसी के आगे नहीं झुकता तो इस पर भी भगवान् बुद्ध ने अपना इरादा नहीं बदला और वो बेफिक्री से इधर उधर घूमने लगे | डाकू को इसका पता चला तो वो झुंझलाकर उनके पास आया |

वह उन्हें मार डालना चाहता था लेकिन जब उसने बुद्ध को मुस्कुराकर उसका स्वागत करते देखा तो उसका पत्थर दिल कुछ मुलायम हो गया | बुद्ध ने उस से कहा क्यों भाई सामने के पेड़ से चार पत्ते तोड लाओगे | उसके लिए यह काम कोनसा मुश्किल था वह भाग कर गया और चार पत्ते तोड़ लाया तो बुद्ध ने उस से कहा कि क्या अब तुम इन्हें जन्हा से तोड़ कर लाये हो क्या उसी जगह इन्हें वापिस लगा सकते हो इस पर डाकू ने कहा यह तो संभव ही नहीं है |

बुद्ध ने कहा ” भैया जब जानते हो कि टूटा हुआ जुड़ता नहीं है तो फिर तोड़ने का काम ही क्यों करते हो ,बुद्ध की ये बात सुनते ही उसकी बोध हो गया और वह ये गलत धंधा छोड़ कर बुद्ध की शरण में आ गया |