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Difference between girl and boy in hindi -लड़का और लड़की में फर्क क्यों

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Difference between girl and boy in hindi –  मेरे पापा की shop है तो अक्सर ग्राहकों के अलावा जानने पहचानने वाले भी आते है मुझे नहीं पता मैं वंहा क्यों था क्योंकि मुझे इस काम में रूचि नहीं है इसलिए मैं कभी कभार ही जाता हूँ पर मैं वंहा था थोड़ी देर बाद एक पापा के जानकार आते है और counter पर पड़े पुराने चुनावी पोस्टर्स जो चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों ने इधर उधर दीवारों पर चस्पां करने के अलावा दुकान पर भी रख छोड़े थे को देखते हुए उनकी इच्छा चुनाव पर चर्चा करने की हुई |

Difference between girl and boy in hindi
Difference between girl and boy in hindi

 

पापा के जानकर ने बात करते करते एक पोस्टर उठाया जिस पर एक ‘महिला प्रत्याशी’ के बारे में कुछ डिटेल्स लिखी थी और चूँकि इस बार में चुनाव में वो हार गयी तो इस बहाने उनकी हार और जीतने वाले के factors पर बात चलने लगी | उन महानुभाव ने कहा इसे तो हारना ही था मैंने तो इसके भाई से पहले ही बोला था इसकी शादी करदे क्योंकि शादी की उम्र है तो यही सही है और जीत भी जाती तो कौनसा शादी के बाद यंहा आकर इसने काम संभालना था | सब औपचारिकता है पिछली बार इसका भाई जीत गया कौनसा कम है जो इस बार भी महिला की सीट होने की वजह से इसे खड़ा कर दिया चुनाव में अच्छा लगता है क्या ? और बहुत कुछ उन्होंने बोला

लेकिन अब मेरे से अधिक सुना नहीं गया मैंने उनसे कहा माफ करना अंकल पर जब मैं यंहा हूँ आप ये दकियानूसी बाते कर रहे है तो मैं तो कम से कम ये सुन नहीं सकता और मैंने उनसे कहा  कि “पहली बात आप कौन होते है जो उसकी शादी की उम्र के बारे में बात करने वाले क्योंकि पहला ये उसका व्यक्तिगत फैसला है वो जब चाहे करे और दूसरा कौनसा आपको इस बात से फर्क पड़ता है वो शादी करें न करें या केवल इसलिए कि वो एक महिला है ? |” जबकि ऐसे में आप सिर्फ ये इसलिए कह रहे है क्योंकि वो एक गरीब घर की बेटी है और आपको लगता है राजनीति केवल मोटे पेट वाले लोगो का क्षेत्र है तो आप गलत सोचते है | जबकि वो केवल एक महिला ही नहीं है जबकि इस क्षेत्र में रह रहे  बाकि लोगो की तरह रहने सोचने और अपने अस्तित्व के लिए कुछ भी फेसला अपने मन से लेने का अधिकार रखती है आप उसके लिए चीज़े कैसे decide कर सकते है उसे खुद पर भरोसा है कि वो बदलाव का हिस्सा बन सकती है और नेतृत्व करने की क्षमता रखती है तो कम से कम आपसे तो बेहतर है वो चुनाव में प्रत्याशी तो है इतना दमखम तो रखती है ,रैलियों में भाषण देने और प्रचार करने का माद्दा रखती है  आप तो वो भी नहीं हो सकते |

महानुभाव ने कुछ भी नहीं बोला मैं बोलता चला गया जब तक पापा ने मुझे नहीं डांटा और कठोरता से ये अहसास नहीं करवा दिया कि बड़ो से ऐसे बात नहीं की जाती है | बेशक पापा मुझसे नाराज से कि मैंने उनके किसी जानने वाले के साथ बुरा बर्ताव किया लेकिन मुझे ख़ुशी थी कि मैंने बन्दे को सोचने पर मजबूर कर दिया |

मेरे इस अनुभव के बारे में आप अपने विचार हमे कमेन्ट के माध्यम से अवश्य नीचे दें |