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दूसरों से नहीं करें अपनी तुलना -Don’t Compare yourself Hindi

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Don’t Compare yourself Hindi – हम अक्सर जिन्दगी में हमारे पास जो साधन होते है जो खुशियाँ होती है वो कितनी बड़ी है या कितनी छोटी है इस बात को इस पैमाने पर मापते है कि लोगो के पास क्या क्या है इस तरह हम अपनी खुशियों और गुणों की तुलना करते है किसी दूसरे से जो हमसे बिलकुल अलग होता है जबकि यह अनुचित है आईये एक कहानी के जरिये इसे समझते है ।

किसी जंगल में एक कौवा रहा करता था वो अपनी जिन्दगी से बड़ा संतुष्ट था क्योंकि उसको जीवन से अधिक कुछ मांग नहीं थी । मजे में रहता और इधर उधर उड़ता । उसके दिन सही से कट रहे थे । एक दिन उसने किसी हंस को देखा । हंस की सुन्दरता को देखा तो उसे लगा यह कितना सुंदर है एकदम निर्मल और श्वेत  तो कौवे ने सोचा यह इतना सुंदर है यह सबसे अधिक खुश होगा ।

कोवे ने जाकर आखिर हंस से पूछ ही लिया कि भाई तुम इतने सुंदर हो इसलिए खुश तो बहुत होंगे था तुम इस पर हंस ने जवाब दिया हाँ मैं खुश था लेकिन केवल तब तक जब तक मैंने जब मैंने तोते को नहीं देखा था अब जबसे उसे देखा है तो लगता है वही इस धरती का सबसे सुंदर प्राणी है । इसलिए वो हमसे कंही अधिक खुश होगा क्योंकि उसके पास दो दो रंग है उसके गले में लाल रंग का घेरा और सुर्ख हरा रंग सच में वो बेहद खूबसूरत है । इस पर कौवा तोते के पास गया और उस से पूछा कि भाई तुम दो दो रंग पाकर बड़े खुश हो न । इस पर तोते ने कहा हाँ मैं तब तक खुश था जब तक मैंने मोर को नहीं देखा था । मोर के पास तो कई तरह के रंग है ।

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इस पर कौवे ने सोचा मोर से मिलना भी अच्छा रहेगा और मैं इस पहेली को सुलझा ही लूँगा की आखिर सबसे अधिक खुश कौन है । इस पर कौवा मोर के पास पहुंचा जो चिड़ियाघर में था और उसने देखा कि मोर को देखने बहुत से लोग आये हुए है इस पर सबके चले जाने के बाद कोवे ने मोर से सवाल किया कि भाई तुम दुनिया के सबसे सुंदर जीव हो और रंग बिरंगे हो तुम तो दुनिया के सबसे खुश जीव होंगे । इस पर मोर ने दुखी होते हुए कहा ” भाई अगर हूँ तो भी क्या फर्क पड़ता है मैं इस चिड़ियाघर में कैद हूँ और कौवे को कोई चिड़ियाघर या कैद में नहीं रखता है इसलिए तुम जन्हा चाहो घूम सकते हो इसलिए दुनिया के सबसे संतुष्ट और खुश जीव तुम हो । कौवा हैरान रह गया उसके जीवन की अहमियत कोई दूसरा बता रहा था ।

ऐसे ही हम करते है हमारी जिन्दगी में बहुत सारी चीज़े ऐसी होती है जिनके बारे में हम उनकी अहमियत नहीं समझते और दूसरों के पास की छोटी ख़ुशी भी हमें बड़ी लगती है जबकि हमारे पास होने वाली बड़ी खुशियों को हम इंग्नोर करते हुए उनकी अहमियत खो देते है ।

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