Home प्रेरक प्रसंग Dr. Rajendra Prasad childhood Story in Hindi – डॉ राजेन्द्र का प्रेरक...

Dr. Rajendra Prasad childhood Story in Hindi – डॉ राजेन्द्र का प्रेरक प्रसंग

SHARE

Rajendra Prasad childhood Story (डॉ राजेन्द्र का प्रेरक प्रसंग) – कलकता के प्रेसीडेंसी कॉलेज के सन 1906 का एक घटनाक्रम मैं आपसे साझा करना कहूँगा जो मैंने बचपन में किसी किताब में पढ़ा था कि कॉलेज में एक बार परीक्षा परिणाम सुनाया जा रहा था और जो विद्यार्थी पास हो गये थे वो ही एम ए की परीक्षा में बैठ सकते थे | कालेज के प्राचार्य का स्वाभाव बहुत ही सख्त था और वो पूर्व परीक्षा का परिणाम सुना रहे थे |

Rajendra Prasad childhood
Rajendra Prasad childhood

 

एक बहुत ही साधारण लड़का भी उन्ही छात्रों के बीच बैठा हुआ था उसका पास होने वाले छात्रों में कंही कोई नाम नहीं था | उसने खड़े होकर प्राचार्य से गंभीरता से  पूछा ‘सर ! अपने मेरा नाम नहीं सुनाया ?’ प्राचार्य ने बताया कि सूची में तुम्हारा नाम नहीं है इसका सीधा सा मतलब है कि तुम पास नहीं हुए हो इसलिए तुम्हारा नाम मैं कैसे बताऊ ?

विद्यार्थी ने कहा ‘ऐसा कभी नहीं हो सकता कि मैं पास नहीं होऊ ‘ यह सुनकर प्राचार्य चिढ गये और अनुशासनहीनता पर पांच रूपये जुरमाना लगा दिया | विद्यार्थी ने फिर ने फिर गंभीरता से यही बात बोली लेकिन प्रधानाचार्य भी अपनी बात पर थे और जैसे जैसे उस विद्यार्थी की जिद बढती गयी वैसे वैसे जुरमाना भी बढ़ता गया | बढ़ते बढ़ते प्राचार्य ने उस पर पचास रूपये का जुरमाना कर दिया |

जब दोनों में स्वाभिमान की यह जिद चल ही रही थी कि कॉलेज का एक बाबू दौड़ते हुए आया और प्राचार्य से कहा कि यह विद्यार्थी तो सर्वप्रथम आया है और गलती से इसका नाम सूची में लिखने से रह गया था | प्राचार्य के मुख पर अब ग्लानी और लज्जा के भाव थे लेकिन विद्यार्थी का सिर स्वाभिमान से ऊपर हो गया था |

यह विद्यार्थी दूसरा कोई नहीं था जबकि ये होनहार छात्र थे हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद |

 

ये कहानी आपको कैसी लगी इस बारे में अपने विचार हमे कमेन्ट के माध्यम से अवश्य बताएं |