Home मेरी कवितायेँ हमारे लिए ही दुआएं मांगी है

हमारे लिए ही दुआएं मांगी है

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” मैंने कहा उस से….
क्यों इतनी दूरियां बनाई है
अब तुम बिन जीना मुश्किल मेरा
जरा करीब आओ
तुम्हे मेरे प्यार की दुहाई है
कहती मिलना मुश्किल हमारा
हर रोज़ यही समझाती हो ,
तुम्हारा भी कोई अंदाज़ा नहीं
न पूरी तरह आती हो
न पूरी तरह दिल से जाती हो !
कहने लगी ……
तुम क्यों नहीं समझते
ये फासले ये दूरियां
मेरी कौनसी अपनी है
पागल तुमसे ही तो जीने की
ख्वाहिशें फिर से जागी है
आज मेने मंदिर में फिर से
हमारे लिए ही दुआएं मांगी है… “

कमल अग्रवाल