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एक तन्हा शाम

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तन्हा शाम में एतबार खो बैठा हूँ ,

दम भर पी आज मैंने ,

हो न हो होश खो बैठा हूँ ,

सोचा तो था जी लूँगा बिन तेरे

पर मंजिल अकेले तय न हुई सो

कुछ यादे पुरानी खोल बैठा हूँ ,

तुम्ही ने तो कहा था न कि

यूँ तबियत से आंखे बंद करोगे

तो मुझे अपने पास ही पाओगे

मैं तो तेरे इंतज़ार में

हर सुबह को शाम किए बैठा हूँ ।

कमल अग्रवाल