Home मेरी कवितायेँ सारी गलती तुम्हारी है..

सारी गलती तुम्हारी है..

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क्या करे …
इश्क हम पर भारी है,
तो ही तो इतनी लाचारी है ,
तभी तो नखरे तुम्हारे
यूँ बेशुमार ,
और ये जुल्म
बराबर से जारी है ,
सही कहती थी तुम
यूँ अनजाने ही मोहब्बत
नहीं मिला करती ,
तुम ही थे ना वो
जो मेरे रास्ते आये
सारी गलती तुम्हारी है..

कमल अग्रवाल