Home विचार प्रवाह धर्मांतरण पर इतना हाहाकार क्यों ???

धर्मांतरण पर इतना हाहाकार क्यों ???

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लोग मुझे नहीं पता क्यों इस धर्मांतरण के मुद्दे पर इतना हाहाकार मचाये है अब ये घर वापसी का चक्कर कम से कम मुझे नहीं लगता किसी बहस के लायक है जबकि टी वी चेनलो को तो जैसे कुछ नया सा मिल गया हो अब मैं तो इस से तठस्थ हूँ लेकिन फिर भी कहना चाहूंगा धर्म को तमगा नहीं है कि अपने लगाया और आपकी पहचान सुनिश्चित हो गयी या कोई ये नहीं है कि किसी खास वर्ग के लोग धर्म बदलने से अपना आचार विचार खो देंगे क्योकि अब ये तो किसी व्यक्ति विशेष का अपना चुनाव है अगर धर्म को बदलने का आधार ये है कि आप परम्परागत है और किसी धर्म के रस्ते से आपको विश्वास है कि आप परमात्मा को पा लेंगे और किसी दूसरे की अपेक्षा आप जिस धर्म को ग्रहण कर रहे है उसमे और उसकी शिक्षाओं में आपकी जिसे आप छोड़ रहे है उस से ज्यादा कुछ आस्था है तो बेशक आप ये कर सकते है उसमे मैं और बाकी के कोई लोग बोलने का कोई अधिकार नहीं रखते ।

और अगर बात ये है कि कोई समूह विशेष किसी की मज़बूरियों का फायदा उठकर किसी लालच को देकर अगर धर्म परिवर्तन जैसा काम कर रहे है तो भी मैं तो कहूँगा फिर भी लालच में आने वाले दोषी है क्योकि उन्हें चाहिए कि पहले वो विवेक से काम ले और कैश पहले ले उसके बाद जब वो आपका काम कर रहा है तो आपको भी उसका अनुसरण करने की इच्छा है तो इसमें क्या बुराई है अब ऐसा तो है नहीं की धर्म को चाटकर आप अपना पेट भर सकते है तो क्यों न पारस्परिक सहयोग चाहे वो किसी भी रीति से हो , किया जाये और अपना जीवन स्तर सुधारा जाये ।

जबकि अगर बाद में आपको शिकायत है तो कि फलां ने आपको वादा किया और अब धर्म परिवर्तन करने के बाद आपकी मांगे या वादे पूरे नहीं कर रहा तो शिकायत करने जैसी कोनसी बात है आप उसे रिवर्स भी तो कर सकते है कोनसा भारत में ढोंग करने के पैसे लगते है जबकि मेरे ख्याल से कोई भी बुद्धिजीवी या समझदार इंसान जानता होगा कि व्यक्ति के कृत्य जो है वो मायने रखते है उसी से आपकी पहचान होती है न कि आपके धार्मिक होने से आप समाज में कोई विशेष स्थान रखने लगते है जबकि आप जेल में बंद अधिकतर कैदिओ को देखे तो नास्तिक उसमे से कम ही पाएंगे सारे के सारे धार्मिक है और किसी न किसी धर्म से वास्ता रखते है  तो कैसा डिस्कसन कैसी बहस बात बड़ी साधारण है बस आपको राजनीतिज्ञ फायदा उठाने के लिए बेवकूफ बना रहा है और आप बनते चले जा रहते है । वोटबैंक के लिए समूह बनते है कोई एक प्रभावशाली शख्स अपनी शक्तियों के विस्तार या अपना प्रभाव बढ़ने के लिए आपको इस्तेमाल करते है और आप धर्म के नाम पर होते चले जाते है और अपना धर्म भूल जाते है जो आप समाज के लिए अपने परिवार के लिए इतनी जिम्मेदारिया रखते है उन्हें दिन रात एक करके पूरा करते है वो भी तो धर्म है जो आप निभाते है बस उनको अच्छे से निभाए यही हमे हर एक धर्म सिखाता है ।

और मैं तो सदेव इस दुविधा में पाता हूँ किसी जगह जन्हा मुझसे धर्म मेंशन करने के बारे में औपचारिकता दिखानी होती है मैं क्या लिखूं खुद को क्योकि मैं एक हिन्दू परिवार में पैदा हुआ हूँ जिसका कोई प्रमाण पत्र नहीं है जबकि मैं खुद बाइबिल की शिक्षाओं से खुद को जोड़ता हूँ तो मैं क्यों नहीं खुद को कभी ईसाई लिख पाता क्योकि इस के लिए हर जगह मुझे प्रमाण पत्र दिखाना होता है जो की बनाने के लिए काफी मुश्किल चीज़ो से गुजरना होता है क्योकि ये प्रमाणित करने वाला कोई अधिकारी रिपोर्ट करने के लिए तैयार नहीं होता कि मैं ईसाई हूँ क्योकि मेरी पहचान मेरे माँ पापा से है और बचपन से उन्हें बताया गया है कि वो हिन्दू है जबकि ये उनका अपना निजी चुनाव नहीं था | |

तो मैं तो कहूँगा अधिक दुविधा है तो नास्तिक हो जाइए परेशानी अपनी जड़ ही छोड़ देती है फिर न आपको किसी बहस में शामिल होना पड़ेगा और न ही किसी समूह का हिस्सा बनने की अनमनी बात पर विचार करना पड़ेगा क्योकि इतने तो आप खुद विवेकशील हो ही सकते है कि अपने बारे में अच्छा क्या है बुरा क्या फिर जिस दिन परमात्मा खुद आके आपसे खड़े कि नहीं मैं इस धर्म का हूँ उस दिन आप उस बारे में विचार करने को सोच सकते है लेकिन तब तक मैं कहूँगा दूर खड़े होकर इंतज़ार करे ।

कमल कुमार ‘विद्रोही’