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एक फ़ोन कॉल की भावनाओं को दर्शाती मेरी कुछ पंक्तियाँ -A Phone Call Love Poem Hindi

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A Phone Call Love Poem -जिस तरह से जिन्दगी संभावनाओं से भरी है कि जाने कब कौन आपकी जिन्दगी की हिस्सा बन जाए उसी तरह जिन्दगी उसी level की अनिश्चिताओं से भी भरी है और भारतीय परिवेश के प्यार में अगर बात करें तो यह सच में बड़ा बेदर्द सा अहसास है जिन्हें मेने इन पंक्तिओं के माध्यम से यूँ रूबरू किया है –

phone call hindi love poem
A Phone Call Love Poem

ये एक फ़ोन कॉल था ,
याद दिला गया उन लम्हों की
स्कूली दिनों की आशिकी का
जब मन पर पूरा जोर था ,
जानी पहचानी आवाज को
आज भी पहचानते देर न लगी
अब वो वक़्त नहीं रहा फिर भी
वो आवाज आज भी अपनी सी लगी
कहने लगी ‘कमल’ कैसे हो तुम
अब याद तो मुझे करते ही होवोगे
जानती हूँ ये लम्बा वक़्त था इन्तजार का
फिर भी यादे पुरानी संजोते ही होवोगे
मैंने कहा क्या कहूँ अब तुमसे
कहने को मेरे पास शब्द ही नहीं
बड़े जतन से दिन बीते वो मेरे कि
अब लगता है याद करने की बस जरुरत नहीं
अब तो आदी हूँ इस अकेलेपन का
कहने को अब ये भी मुझे भाता है
भरोसा रह नहीं गया प्यार पर मुझे
अकेले जीना भी तो मुझे आता है
कहने लगी ताने छोड़ो ये बताओ
अब भी प्यार करते हो कि नहीं ?
मैंने भी बड़ी बेफिक्री से कहा
अब फर्क भी क्या पड़ता है न तुम्हे न मुझे
अब मन में वो आवारगी वो दीवानगी कंहा ?
सब बह गया जब तुम लौटकर आई हो
अब प्यार में वो नयापन कंहा ??        Next

-कमल अग्रवाल

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