Home General Knowledge भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान की बारे में कुछ रोचक बातें

भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान की बारे में कुछ रोचक बातें

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GSLV यानि के जियोस्टेशनरी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के बारे में बात करें तो यह साधारण भाषा में Satellite को ले जाने वाला वो वहां होता है जो उपग्रह को अपने साथ ले जाता है और उसे उसकी कक्षा में स्थापित करने में मदद करता है | यह उस तरह के उपग्रहों को ऊपर स्पेस में भेजने के काम आता है जिनको पृथ्वी के ऊपर 36000 किलोमीटर ऊपर कक्षा में स्थापित किया जाता है और चूँकि संचार आदि के काम आने वाले  Satellite जो है वो दो टन से अधिक वजन के होते है ऐसे में हम कह सकते है कि  GSLV जो होते है वो दो टन से अधिक के भार को अपने साथ ले जाने में सक्षम होते है तो चलिए कुछ और जानकारी हम प्राप्त करते है आज की हमारी इस खास पोस्ट  GSLV information in hindi  में जानते है कि GSLV क्या होता है और यह कैसे काम करता है –

GSLV information in hindi

GSLV  असल में satellite को अन्तरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने के लिए उपग्रह को ले जाने और उसे स्थापित करने के लिए वहां होता है जो पृथ्वी से satellite को उपर ले जाता है और उसे 36000 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित करता है | यह कक्षा भूमध्य रेखा और विषुवत रेखा के सीध में होती है | GSLV यह काम तीन चरण में करता है जिसमे अंतिम चरण में सबसे अधिक बल की आवश्यकता होती है क्योंकि यान को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव वाले क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए जिस निर्धारित वेग को प्राप्त करना होता है वो बहुत अधिक होता है जिसकी वजह से अधिक से अधिक बल को प्राप्त करना पड़ता है |

gslv information in hindi
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GSLV satellite के साथ खास बात यह होती है कि इसकी सहायता से वह उपग्रह छोटे जाते है जिनकी कक्षा पृथ्वी से काफी उपर होती है साथ ही जन्हा PSLV यानि के वो उपग्रह जो पृथ्वी के चारों और घूमते है के बजाय यह उपग्रह जो है वो एक जगह पर स्थिर प्रतीत होते है क्योंकि यह पृथ्वी के साथ साथ घूमते है ठीक उसी वेग से जिस वेग से जिस वेग से पृथ्वी घूर्णन करती है इसलिए यह पृथ्वी की कक्षा में एक ही जगह पर स्थिर रहता है ऐसे उपग्रहों का इस्तेमाल कृषि, जलस्रोतों, शहरी विकास, पर्यावरण, वन, खनिज और महासागरों  आदि के शोध के लिए किया जाता है |

किसी भी राकेट के लिए इतना बल पाने के लिए क्रायोजेनिक इंजन की जरुरत होती है और क्रायोजेनिक इंजन को बनाने के लिए काफी जटिल तकनीकी पहलुओं की जानकारी होना जरुरी है बिना क्रायोजेनिक इंजन के जीएसएलवी  का निर्माण करना लगभग असभ्म्व होता है ऐसे में इसका निर्माण ही मुश्किल होता है और भारत के पास भी पहले इसके निर्माण के लिए उचित sources नहीं थे जिसकी वजह से भारत जो जब भी जरुरत होती थी वह रूस की मदद लिया करता था और उसे इसके लिए बहुत राशी भी चुकानी पड़ती थी जिसकी वजह से भारत का कोई भी अन्तरिक्ष प्रोग्राम बहुत महंगा साबित होता था जिसमे क्रायोजेनिक इंजन की जरुरत पड़ती है क्योंकि इसके लिए भारत दूसरे देशो पर निर्भर था जो बहुत अधिक पैसे चार्ज करते थे भारत के किसी भी उपग्रह को भेजने के लिए लेकिन बाद में भारत ने खुद इस पर काम करना शुरू किया और जल्दी ही यह तकनीक भी हासिल करली और अब की space agency ISRO पूरी तरह उपग्रह भेजने में सक्षम है चाहे वो किसी भी तरह का क्यूँ न हो |

अभी पिछले दिनों भारत ने वो कर दिखाया जिस श्रेणी में बहुत कम देश शामिल है क्योंकि भारत ने मंगलयान यानि के मार्स ऑर्बिटर मिशन को केवल अपने बलबूते पर कामयाब करके दिखाया और यह भारत का और भारत की space एजेंसी इसरो का पहला ऐसा मिशन था जो किसी दूसरे ग्रह पर जाने के लिए था |  5 नवम्बर 2013 को इस मिशन को अंजाम दिया गया साथ ही सबसे कम खर्च में ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया क्योंकि भारत के इस मिशन की लागत 450 करोड़ थी जो नासा के पहले मंगल मिशन का दसवां और चीन के नाकाम रहने वाले मिशन का चौथा हिस्सा है |

तो ये है GSLV information in hindi और अधिक जानकारी के लिए आप नीचे कमेन्ट कर सकते है और हमारी वेबसाइट से hindi में अपडेट पाने के लिए आप हमे फेसबुक या गूगल पर फॉलो कर सकते है साथ ही अगर आप hindi में ईमेल पर पोस्ट पाना चाहते है तो आप हमसे फ्री ईमेल सब्सक्रिप्शन भी ले सकते है |

Image Source – demo pic