Home मेरी कवितायेँ हर पल बेसब्र इंतज़ार है …

हर पल बेसब्र इंतज़ार है …

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जब भी वो हॉस्टल से घर जाती है मैं हमेशा कुछ सिमट जाता हूँ क्योकि पता होता है अब कुछ दिन बात बड़ी मुश्किल से हो पायेगी लेकिन हाँ शुक्र है वो जल्दी ही आएगी ।

आँखों में नींद नहीं और ये सर्द खामोश रातें
पढ़ने के बहाने मैं करता था रात भर उस से बाते
अब यूँ टकटकी लगाये देखना मेरा छत के पंखे को
सूनापन सा दे गयी वो मुझे घर जाते जाते
जाके कहेगी बताओ तुम मैं कैसे न डरूँ
तुम समझते नहीं जरा भी मज़बूरी मेरी
मम्मी है पास मेरे पागल बात कैसे करूँ
तो ही मैंने कहा उस से कि
न जाओ ना करदो कोई तो बहाना
मैं ही जानता हूँ ये दिन कैसे जायेंगे
थोड़े दिन और रुको फिर चली जाना
कहने लगी तुम्हे छोड़के कहां जाउंगी
ये दूरियां जैसे इम्तिहान है प्यार का
इतनी ही बेइंतिहा है मोह्हबत मुझसे तो
ले आना अपने घर मुझे मैं चली आउंगी
फिर ये मेरी थोड़ी सी तो मनमानी है
इतना किया है थोड़ा इंतज़ार और सही
बाकी जिंदगी तुम्हारे साथ ही बितानी है
कैसे कहूँ उसे दिल का क्यों ये हाल है
आएगी मेरे घर जब वो हमेशा के लिए
उस घड़ी का मुझे हर पल बेसब्र इंतज़ार है |
‪#‎Mrk‬ ‪#‎Loveuteddy‬ ‪#‎missu‬

कमल अग्रवाल