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हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के खतरे के बारे में जानिए

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high risk pregnancy in hindi – हाई रिस्क प्रेग्नेंसी अर्थात गर्भावस्था के दौरान पैदा हो सकने वाला संभावित अत्यधिक खतरा जिसे मेडिकल साइंस की दुनिया में एक गंभीर विषय माना जाता है | जो महिलाएं गर्भवती है या फिर जिनका प्लान है उनके लिए हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के बारे में कुछ चीज़े जान लेना बहुत आवश्यक है ताकि प्रेगनेंसी के समय किसी ख़ास तरह की स्थिति में किस तरीके से चीज़े बेहतर हो सकती है उनके लिए कुछ आवश्यक कदम उठा पायें | हम आपसे इस बारे में जानकारी शेयर कर रहे है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की नौबत कब और कैसे तथा किन हालत में आ सकती है चलिए इस बारे में बात करते है –

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को जानिए 

  • अगर प्रेग्नेंट महिला की उम्र अठारह वर्ष से कम है और या फिर 35-40 के बीच है तो ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है | क्योंकि ऐसे में गर्भधारण से लेकर प्रसव तक अनेक प्रकार की जटिलताओं का सामना उनके शरीर को करना पड़ता है और ऐसे में ” हाई रिस्क प्रेग्नेंसी ” की नौबत आ सकती है |

    high risk pregnancy in hindi -हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के खतरे
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  • अगर गर्भवती महिला मोटापे की शिकार हो तो भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थिति हो सकती है |
  • अगर गर्भवती महिला एनिमियां यानि की खून की कमी की समस्या से ग्रस्त हो जो अक्सर इसलिए होता है कि महिलाएं अपनी काया को छरहरी और आकर्षक बनाने के चक्कर में भोजन करने वाली चीजों में से काफी चीज़े चुनाव करके खाती है जिसकी वजह से जरुरी पोषक तत्वों की शरीर में कमी हो जाती है और ऐसी स्थिति में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का खतरा बढ़ जाता है |
  • और ऐसी गर्भवती महिला जिसका एक से अधिक बार गर्भपात हो चुका हो और उसने काफी उपचार के बाद गर्भधारण किया तो भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की नौबत आ सकती है |
  • गर्भ में एक से अधिक शिशु हो या फिर अगर शिशु का वजन निर्धारित वजन से कम हो तो भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति हो सकती है |
  • गर्भ में अगर विपरीत लिंग वाले बच्चे एक साथ पल रहे हो या जुड़वाँ बच्चे हो तो भी गर्भावस्था की जटिलताएं बढ़ जाती है और प्रसव् के समय हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति उत्पन हो सकती है |
  • मधुमेह ,उच्चरक्तचाप ,टीबी ,पीलिया  आदि रोग से ग्रस्त होने पर भी गर्भवती महिला को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है |

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से कैसे करें बचाव – अगर गर्भवती महिला स्वस्थ नहीं है तो डॉक्टर की देख रेख में कुछ खास तरह के टेस्ट नियमित रूप से करवाते रहना चाहिए ताकि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति नहीं बने और साथ ही गर्भवती महिला को लाल साग ,पालक का साग और फलों का भरपूर मात्र में सेवन करना चाहिए साथ ही महिला को आलस को छोड़कर active बने रहना चाहिए ताकि शरीर में मूवमेंट सही से होती रहे और डॉक्टर से समय समय पर परामर्श लेते हुए कुछ हलके फुल्के व्यायाम जो गर्भावस्था के दौरान किये जा सकते है करते रहना चाहिए |

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