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जन्मो का फेर और एक पंडित – Folk of Recent Birth Hindi Old Story

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Folk of Recent Birth  – किसी नगर में एक विद्वान पंडित रहता था जो बेहद ज्ञानवान था और लोग दूर दूर से उस पंडित से सलाह लेने के लिए आते थे लेकिन पंडित  खुद बेचारा बहुत दुखी था क्योंकि उसकी पत्नी बेहद कर्कशा थी वो सारा दिन उसके साथ कलह करती थी | मगर पंडित जी हंस कर सब कुछ सह लिया करते थे | एक बार एक अन्य गाँव का आदमी उनकी ख्याति सुनकर अपनी समस्या लेकर उनके पास आया तो देखा कि पंडित जी के बड़ी फजीहत हो रखी है | उन्ही की पत्नी उन्हें बड़ा बुरा भला कह रही है | तो वो वापिस जाने लगा | सोचने लगा कि जो अपना भाग्य नहीं संवार सकता वो मेरा भाग्य को कैसे संवारेगा | मगर उनके साथ आये आदमी ने एक बार उन्हें अजमाने के लिए कहा तो वो आदमी रुक गया |

उस आदमी ने अपनी समस्या रखने से पहले पंडित जी से कहा कि पंडित जी मेरे मन में एक संशय है कि जब हम यंहा पर आये तो जो कुछ देखा उसके अनुसार तो हमे लगता है आप हमारी संशय का निराकरण नहीं कर पाएंगे इस पर पंडित जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि “यदि वो इस जन्म में मुझे नहीं पकडती हो तो हो सकता है मुझे किसी और जन्म में पकडती ” इस पर वो लोग कहने लगे पंडित जी हम समझ नहीं पाए आप जरा खुल कर बताईये तो इस पर पंडित जी ने कहा कि ‘पिछले जन्म में ये एक ऊंटनी थी और ऐसा हुआ कि अपने काफिले के साथ जाते समय इसका पैर दलदल में धंस गया तो ये जितनी कोशिश करती उतनी और जमीन में चली जाती इस तरह से इसे मुसीबत में अकेला छोड़कर इसके काफिले वाले चले गये | उस जन्म में मैं गिद्ध था और पूरी दुनिया के जानवरों में गिद्ध ऐसा प्राणी है जो अपने शिकार का मांस उसे जिन्दा होते हुए भी खाता है | तब मैंने इसे असहाय पाकर इसे नोच नोच कर खाया था और ये भी मेरे से मेरे से बदला लेने की भावना के चलते इसने अपने प्राण त्यागे तो इसे मुझसे बदला तो लेना ही था |’ इसलिए ये मुझे ऐसे कचोटती है अगर मैं अपना भाग्य सवारने के चक्कर में इस जन्म में इस से शादी नहीं करता तो ये किसी और जन्म में मुझे पकडती इसलिए मैं इसकी बातों का बुरा नहीं मानता |

इसलिए हमे भी मानव जीवन में ऐसे कर्म नहीं करने चाहिए कि कोई हमसे बदला लेने की भावना के साथ अपने प्राण त्यागे और फिर हमे किसी और जन्म में पकडे |