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how many ias seats Empty in india – कितने आईएएस कम है भारत में ।

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ias seats Empty in india – आईएएस के हर साल सिविल exams होने के बाद भी बहुत देश में आईएएस अफसरों की बहुत कमी है लिहाजा इसके चलते सरकार चिंतित भी है साथ ही बता दें कि क्यों ऐसा होता है कि युवा आईएएस यानि के सिविल services में इतनी रूचि रखते है क्योंकि आईएएस रैंक का अफसर होना खुद में बहुत गर्वपूर्ण होता है क्योंकि भले ही लोकतंत्र में सरकार हम लोग अर्थात लोकतंत्र से चुनी जाती है और चूँकि नेता लोग जो चुनावी घोडें है हमारे देश के कर्णधार उनके लिए चुनाव लड़ने के लिए कोई खास डिग्री या यूँ कहे कोई खास शिक्षा योग्यता निर्धारित नहीं है इसलिए हमेशा किसी भी मंत्री का सचिव जो होता है वही असल में नेताओं द्वारा बनायीं गयी योजनाओं का प्रबंधन करता है |

ias seats Empty in india
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इसलिए देश में किसी भी योजना को बनाने उनको लागू करने और उन्हें अमलीजामा पहनाने में इन्ही आईएएस अफसरों का हाथ होता है | देश और दुनिया में चाहे मंदी हो या कुछ भी बुरे हालत हो चूँकि एक आईएएस अफसर का भविष्य बाकि services के मुकाबले कंही अधिक secure होता है इसलिए इसे अच्छी खासी तवज्जो दी जाती है |

एक सर्वे के अनुसार सरकार के प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ समझे जाने वाले आईएएस अधिकारियों की भारत में भारी कमी हो गई। केंद्र सरकार ने स्वयं इस बात को माना  है। पूरे देश में आईएएस अफसरों के कुल 6154 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 4377 आईएएस अधिकारी हैं। पूरे देश में आईएएस अफसरों के 1777 पद खाली पड़े हैं, जो कुल पदों के करीब 30 प्रतिशत के बराबर है। 4377 आईएएस अफसरों में भी ऐसे अफसरों की संख्या शामिल है जो आने वाले वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। राज्यों के आंकड़ों को देखा जाए तो सबसे ज्यादा खाली पदों की संख्या उत्तरप्रदेश में है। यहां पर प्रशासनिक सेवाओं के 216 पद खाली हैं। सबसे ज्यादा आईएएस अफसर देने वाले राज्य बिहार में 128 पद खाली हैं। वह दूसरे नंबर पर है। मध्यप्रदेश में 118, राजस्थान में 112 और झारखंड में आईएएस अफसरों के 100 पद खाली हैं।

छ: राज्यों की अगर बात करें तो आपको बता दें उनमे तो यह संख्या मानक से भी कम है नीचे कुछ आंकड़े दिए है जिस से आप इसकी गंभीरता को समझ सकते है | आंकड़े जो कि कमी को दर्शाते है प्रतिशत में है |

झारखंड  – 44.2  $

नागालैंड – 40.7 %

पश्चिम बंगाल -38.7 %

केरल – 35.1 %

बिहार – 33.1 %

गुजरात -31.0 %

राजस्थान  – 28.7 %

कर्णाटक -28.1 %

हिमाचल प्रदेश -27.9 %

 

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