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विनम्रता – Humility Hindi Story

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Humility Hindi Story -जीवन के आखिरी क्षणों में एक सन्यासी ने अपने सारे शिष्यों को एकत्र किया और सबको एक साथ पाकर उन्होंने अपना मुह पूरा खोल दिया और उनसे सवाल किया कि ‘देखो मेरे मुह में कितने दांत बचे है ?’ शिष्य सारे के सारे एक साथ बोल उठे कि गुरूजी आपका तो एक भी दांत नहीं बचा है | तो इस पर सन्यासी बोला लेकिन देखो मेरी जीभ अभी बची हुई है | जब मेरा जन्म हुआ था तो मेरे जन्मकाल से लेकर अब जब मैं ये शरीर छोड़ रहा हूँ तो जीभ मेरे साथ है जबकि मेरे दांतों ने मेरा साथ छोड़ दिया है ऐसा क्यों ?

शिष्यों ने उत्तर दिया गुरूजी हमे नहीं मालूम ये भी आप ही बताईये | तो इस पर सन्यासी ने कहा मेरी जीभ शुरू से बड़ी विनम्र रही है जबकि मेरे दांत हमेशा से कठोर इसलिए वो पीछे आकर भी पहले खत्म हो गये इसी तरह अगर तुम दीर्घ आयु पाना चाहते हो तो तुम्हे सबसे पहले अपनी वाणी को मधुर बनाना होगा और कठोरता तो पूरी तरह त्यागना होगा |

इस पर एक शिष्य बोला कि गुरूजी कोई और उदहारण भी बताईये तो गुरु ने कहा जिस तरह तेज आंधी के चलने पर भी सहतूत के पेड़ो की डालियाँ सलामत रहती है क्योंकि उनमे लचक होती है और वो सलामत रहती है जबकि तने हुए पेड़ आंधी में तबाह हो जाते है |

उनकी बात सुनकर शिष्यों को समझ आ गया कि विनम्रता से सारे काम हो जाते है |