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मिथ्या मोह – sacha jhoota story

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Sachha jhhota Story – एक बार संत फ्रांसिस के पास एक युवक आया जो खुद बहुत धार्मिक था | संत ने उस से उसका हाल चाल पूछा तो उस युवक ने खुद को बहुत सुखी बताया और बोला कि मुझे अपने परिवार के सदस्यों पर बहुत गर्व है क्योंकि मैं उन सब के व्यवहार से बहुत संतुष्ट हूँ | अपने परिवार के लिए ऐसी आम धारणा नहीं रखनी चाहिए क्योंकि दुनिया में कोई सगा नहीं होता | जन्हा तक माँ बाप के सेवा और पत्नी बच्चो के भरण पोषण की बात है तो वो बस अपना कर्तव्य समझ कर हमे करना चाहिए |

इस पर युवक परेशान हो गया और बोला आपको मेरी बात पर संदेह क्यों है जबकि मेरे परिवार वाले मुझे बहुत स्नेह करते है | अगर मैं एक दिन के लिए भूखा प्यासा रहूँ तो उन्हें चैन नहीं पड़ता और उनकी नींद हराम हो जाती है | मेरी पत्नी तो मेरे बिना जीवित ही नहीं रह सकती है | इस पर संत बोले तुम्हे प्राणायाम तो आता ही है | कल सुबह एक काम करना प्राणवायु मस्तिष्क में खींच कर निश्चेष्ट पड़े रहना और मैं वंहा आकर बाकि सब संभाल लूँगा |

दुसरे दिन युवक ने वैसा ही किया और उसे निर्जीव समझ कर घरवाले विलाप करने लगे |इस पर फ्रांसिस आ पहुंचे और उन सब से बोले कि आप शोक न करें मैं मंत्रो के बल पर इसे जिन्दा कर दूंगा लेकिन उस के लिए एक कटोरी पानी आप सब लोगो में से किसी एक को पीना होगा और पानी के अंदर ऐसा चमत्कार है कि पीने वाला तो मर जायेगा लेकिन इसमें प्राण आ जायेंगे इस पर सब एक दुसरे का मुहं देखने लगे लेकिन कोई भी कटोरी पानी को पीने के लिए तैयार नहीं हुआ इस पर संत बोले की चलो कोई बात नहीं चलो इसकी जगह मैं वो पानी पी लेता हूँ | इतने में प्राणायाम कर रहा युवक उठा और बोला कि महाराज आप ऐसा यत्न न करे मैं अब जान गया हूँ की सांसारिक रिश्ते नाते सब मिथ्या ही होते है और मैं आपकी बात से पूर्णत सहमत हूँ |