Home मेरी कवितायेँ जाहिर करने में हर्ज़ क्या है…

जाहिर करने में हर्ज़ क्या है…

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“..कल रात कहने लगी –
थोड़ा स्टेटस कम अपडेट करा करो
यूँ पब्लिक्ली ‘ आई लव यू ‘ न बोला करो,
डरतीं हूँ इस जालिम जमाने से
यूँ न दिलों के भेद खोला करो ,
मैंने कहा –
यूँ ना खुद को बहकाया करो
तुम्हे दुनिया से क्या ,
अपनी खुशियों से वास्ता रखो
सुबह शाम मिलने आया करो ,
मेरी जिंदगी के कुछ बेहतरीन पल
तुमने ही है दिए मुझे ,
तो लोगो का मुझ पर क़र्ज़ क्या है
क्यों सुनू और डरूं मैं बेवजह ,
प्यार है मुझे तुमसे तो
जाहिर करने में हर्ज़ क्या है…..”

कमल अग्रवाल