Home मेरी कवितायेँ जाने कब ये जालिम नींद मुझे आयेगी…

जाने कब ये जालिम नींद मुझे आयेगी…

SHARE

लो एक और दिन गुजर गया
बिना तुम्हारे नितांत अकेले ,
ये तन्हा रात भी गुजर जाएगी
तेरे ख्यालों में हूँ मैं डूबा हुआ
जाने कब ये जालिम नींद आयेगी,
रात के इस सन्नाटे में गूंजती
हमारी वो बातें मुलाकातें,
कि लगता है आंखे खोलूँगा और
वो मेरे आगोश में चली आयेगी,
आज इतवार था और
पूरा दिन तुम में बीता,
वो कौनसा दिन होगा
जब दूरियाँ मिट जायेगीं,
जाने कब ये जालिम नींद
मुझे आयेगी…….. ।

कमल अग्रवाल