Home मेरी कवितायेँ जितना है बस काफी है..

जितना है बस काफी है..

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“…जिंदगी में उतार चढ़ाव बेहद स्वाभाविक है क्योकि कई बार चीज़े हमारे मायनो में हमारे अनुकूल नहीं होती और आप पाते है आप हताश होने लगे है लेकिन जैसे #योगेश कहता है कि भाई… बुरे वक़्त की भी एक खूबी है कि वो अंतत:बीत ही जाता है और फिर खुशियां आपसे कभी दूर नहीं है बशर्ते आप किसी भी स्थिति में अपने सपनो का साथ न छोड़े.. ” ये मेरे कल शाम की सैर के बाद का सार है जो मुझे समझ आया और ये मेरी कुछ पंक्तियाँ जो मेरी मनोदशा को बखूबी बयां करती है :-

आज शाम की सैर को निकला मैं

कुछ निराशा में, कुछ हताशा में ,

हजारों मन में शंकाएं लिए

ढेरों कल की चिंताए लिए

चलता ही गया बेतहाशा मैं ,

बादल सी छायी उदासी और

अब दर्द ये दिल के गहरे है ,

सड़क किनारे बगीचे के अब

फूल भी ये कुछ कह रहे है ,

सहसा मेरी नज़रे रुकी

पल भर ठिठका फिर चौंक गया

उसी किनारे एक औरत को

जब देखा बीनते लकड़ी तो

विचार ये मन में कौंध गया कि देखो

इनके कल के चूल्हे की जुगत नहीं

पर जीवन फिर भी अभी बाकी है

यंहा ऐसे ही मैं चिंता में हूँ

जितना है बस काफी है …

कमल अग्रवाल