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चंचलता से हुआ अंत – kachuva short story for kids in hindi

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kachuva short story – शरारते जिन्दगी का एक आवश्यक भाग है लेकिन फिर भी अधिक शरारतें कभी कभी मुसीबत का सबब बन जाती है हम एक कहानी के द्वारा इसे समझते है  एक बार एक कछुवा था जो एक बड़े से तलाब में रहता था और तलब के किनारे रहने वाले दो हंसो से उसकी बहुत अच्छी दोस्ती थी | तीनो दिन भर बातें करते और खूब मजे करते | एक बार किसी साल बिलकुल भी बारिश नहीं हुए इस पर हंसों को अपने कछुवे दोस्त के लिए चिंता होने लगी तो उन्होंने कछुवे से इस बारे में विचार विमर्श किया |कछुवे के उन्हें चिंता नहीं करने को कहा और उनको एक युक्ति बताई कि तुम दोनों आस पास उड़कर जाओ और किसी अच्छे तलाब की तलाश कर आओ उसके बाद मुझे एक लकड़ी के टुकड़े से लटकाकर वंहा ले चलना |

हंसो को कछुवे की युक्ति पसंद आई तो तालाब के मिल जाने पर हंसों ने उसे चलने के लिए कहा और साथ में ये शर्त रखी कि वो तालाब यंहा से काफी दूर है तो उड़ान के दौरान अपना मुह बंद रखना नहीं तो तुम गिर जाओगे |इस पर कछुवे ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वो किसी भी हालत में अपना मुह नहीं खोलेगा इस पर हंसो ने उसे लकड़ी के टुकड़े को कस कर मुह से पकड़ने को कहा और दूसरा छोर वो पकड कर उसे ले चले | रास्तों में लोगो ने जब कछुवे को उड़ते देखा तो वो आश्चर्य से चिल्लाने लगे | लोगो का चिल्लाना सुनकर कछुवे से रहा नहीं गया और वो अपनी शर्त भूलकर कुछ कहने के लिए जेसे ही मुह खोला वो आकाश से गिर पड़ा | ऊँचाई अधिक होने के कारण कछुवा चोट सहन नहीं कर पाया और नीचे गिर कर मर गया |

moral : बुद्धिमान भी अगर अपनी चंचलता पर काबू नहीं रखता तो उसका परिणाम बहुत बुरा हो सकता है |