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मन का खोट – Management story with moral

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Management story with moral – दो बड़े अच्छे मित्र थे नाम था कर्मपाल और विजयपाल | दोनों की कारोबार में साझेदारी थी और उनकी एक आढ़त की दुकान थी | चूँकि दुकान शहर के बीचोबीच थी इसलिए अच्छी आमदनी हो जाती थी और दोनों के दिन बड़े मजे से कट रहे थे | दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी |

Management story with moral
Management story with moral

 

एक दिन कर्मपाल ने अपनी पत्नी से कहा कि ‘हमे एक साथ काम करते हुए एक अरसा हो गया है पर मैंने कभी भी अपने मित्र को अपने घर खाने पर नहीं बुलाया सो मुझे लगता है उसे आज शाम के खाने पर बुलाते है तुम्हारा क्या ख्याल है ?” उसकी पत्नी ने भी हामी भर दी और बोली चलो ठीक है तुम बुला लो आज ही |

शाम को उसने अपने मित्र को अपने यंहा खाने का न्योता दिया और उसे बुला लिया विजय ने उसके यंहा आकार नाश्ता वगेरह किया और अपने मित्र के बच्चो के साथ खेलने लगा | जब थोड़ी देर बाद खाने का समय हुआ तो कर्मपाल उसे बुलाने आया कि चलो खाना तैयार है तुम आ जाओ |  जब विजय खाने पर बैठा तो उसे बड़ी हैरानी हुई और सोचने लगा मेरे घर में एक सब्जी बनती है लेकिन यंहा तो तरह तरह की दालें और सब्जियां बनी है कंही ऐसा तो नहीं है मेरा मित्र कारोबार में मेरे साथ कोई गड़बड़ी करता है | उसे अपने मित्र की ईमानदारी पर शक होने लगा लेकिन वह चुप ही रहा और अपने घर लौट गया |

कर्मपाल को थोडा अजीब लगा और शक हुआ कि विजयपाल इतनी जल्दी घर कैसे चला गया कुछ तो गड़बड़ है  | लेकिन कोई बात नहीं जल्दी ही पता लग जायेगा सोचकर वह भी चुप ही रहा | अगले दिन विजय जल्दी ही दुकान पर चला गया लेकिन उसके मन वही बात थी इसलिए उसका मन नहीं लग रहा था और जैसे तेसे ग्राहकों को वह निपटा रहा था इसी बीच एक बोरी को लुढकते समय वह गिर गया और उसकी कमर में खिंचाव आ गया इस पर कर्मपाल ने उसे संभाला और वैध्य को बुलाया | कर्मपाल ने विजय को उसे घर लेजाकर उसकी मालिश की और सेवा पानी किया तो विजय की नींद लग गयी |

विजय जब नींद से उठा तो क्या देखता है कि कर्मपाल की पत्नी उसकी पत्नी शारदा के पास बैठी है और बोल रही है कि बहन तुम विजय का ध्यान रखो आज का खाना मैं बना देती हूँ और वो रसोई की तरफ बढ़ जाती है | उसके यंहा रसोई में सामान तो काफी था लेकिन वो सारा बिखरा हुआ था कर्मपाल की पत्नी यशोदा ने सबसे पहले सामान को ठीक किया और उसके बाद बड़े प्यार से खाना बना दिया | जब खाना तैयार हो गया तो विजय फिर हैरान रह गया उसने देखा कि यशोदा ने अपने घर की तरह ही यंहा भी दो प्रकार की सब्जियां और दो प्रकार की दाल बनाई है तो सोचने लगा कि इसका प्रबंध भी लगता है यशोदा ने किया है और उसे ग्लानी हुई उसकी ये बात यशोदा ताड गयी और बोली कि भाईसाहब जल्दी जल्दी में जो कुछ मुझसे बना मैं बनाकर ले आई जबकि आपके घर में सामान तो बहुत है लेकिन वो बिखरा हुआ है जबकि मेरे घर में सामान कम है लेकिन मैं सही से रखती हूँ | वह सारा मामला समझ गया कि बात सिर्फ प्रबंधन की है और उसने अपनी गलती के लिए दोनों से माफ़ी मांगी |

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