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सुख चैन का मंत्र – Mantra of peace in Hindi story

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Mantra of peace in Hindi – एक नगर में कोई धनी परिवार रहता था उनके घर में किसी चीज़ की कोई कमी न थी लेकिन फिर भी कुछ भी अच्छा नहीं था क्योंकि घर का माहौल बहुत अशांत था और हर समय कलह होती रहती | परिवार के मुखिया का नाम हंसमुख था लेकिन उसके चेहरे पर कभी किसी ने हंसी ख़ुशी नहीं देखी | उसका एक मित्र काशी मैं रहता था तो उसका एक पत्र आया उसने पत्र में पुछा था कि काशी से आते समय उसके लिए क्या लेकर आयें |

हंसमुख ने जवाब में एक पत्र  लिख दिया जिसमे लिखा था तुम काशी से सुख चैन लेकर आ जाओ |उसका मित्र समझ नहीं पाया कि वो ऐसा क्या लेकर आयें जिस से हंसमुख के घर में सुख शांति हो जाये | अपनी समस्या के समाधान के लिए वो अपने गुरु के पास गया और पुछा कि गुरूजी क्या किया जाये | गुरु ने उसे एक कागज में पेन से लिखकर दिया और कहा ये तुम मत पढना ये तुम्हारे मित्र के लिए है | तो गुरु का कागज लिए उसका मित्र हंसमुख के घर आया और उसे वो दे दिया |

हंसमुख उस कागज को पढ़कर बेहद आनंदित हो गया और अपने मित्र से बोला कि दोस्त आखिर में तुमने मेरे लिए अपनी मित्रता निभाई और दुनिया की सबसे अनमोल वास्तु सुख शांति मेरे लिए खोज ले आये | कागज पर लिखा था ” अगर मन में विवेक की चांदनी छिटकती हो और संतोष व धेर्य की धारा बहती हो ,तो उसमे सुखचैन का निवास होता है ” तो उसे पढ़कर हंसमुख का मित्र बोला यह उपहार तुम्हारे लिए ही नहीं बल्कि मेरे लिए भी अनमोल है क्योंकि यही तो सुख चैन पाने का मंत्र है |