Home मेरी कवितायेँ मेरा अपना एक जहाँ है …

मेरा अपना एक जहाँ है …

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“….वो अक्सर मुझसे बहुत सवाल करती है कि कोई कैसे पागलपन की हद तक किसी को प्यार कर सकता है और कहती है…
क्यों मुझसे इतना प्यार करते हो
इतना सुनाती हूँ दिन भर तुमको,
फिर भी दुनियां जंहा का
मुझ पर एतबार करते हो ,
मैं कहता हूँ देखो
इतनी बातें मुझे आती नहीं
सच तो ये है कि एक पल भी
तुम मेरे जेहन से जाती नहीं ,
तुम्हारा भी ये क्या सवाल है
क्यों चाहता हूँ तुम्हे इतना
क्यों मानता हूँ तुम्हे अपना ,
ये तो एक अरसे से बवाल है
हाँ पर इतना जानता हूँ
तुमसे है जिंदगी हर आरजू मेरी
ख्वाबों के उस पार तुम्हारे संग
मेरा अपना एक जहाँ है ……”

कमल अग्रवाल