Home मेरी कवितायेँ मेरा तो मन रोने को आया है ..

मेरा तो मन रोने को आया है ..

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“..और वो कहने लगी
क्यों इतना प्यार लुटा रहे हो
जब मालूम है तुमको कि
दूर जा रही हूँ मैं अब तुमसे तो
अब हक़ीक़त में लौट आओ पागल
क्यों बेवजह खुद को सता रहे हो ,
ये तो तुम भी जानते हो कि
कितना प्यार मैं तुमसे करती हूँ
पर हाथ तुम्हारा थामूँ तो
कुछ रिश्ते जज्बाती उलझते है
बस इसलिए थोड़ा डरती हूँ ,
अब मान भी जाओ बात मेरी
क्यों खुद को तड़पाते हो
तुम बिन जीना यूँ आसान तो नहीं
रह रह के खयालो में आते हो ,
पर सब कुछ मिलना,मन की होना
हमेशा हर पल मुमकिन नहीं
और फिर हर एक अमर प्रेम कहानी में
बिछड़ना तो सदियों से होता आया है
देख तुम्हारी हालत ये मुझको
मेरा तो मन रोने को आया है ..”

कमल अग्रवाल