Home Short Stories झील का चाँद – Moon of lake hindi story

झील का चाँद – Moon of lake hindi story

SHARE

Moon of lake – एक बार एक व्यक्ति एक संत के पास अपनी समस्या लेकर गया और संत से बोला कि गुरूजी मुझे जीवन के सत्य का सम्पूर्ण ज्ञान है और मेने बहुत से शास्त्रों का अध्ययन किया है जबकि उसके बाद भी मेरे साथ ये समस्या है कि मेरा किसी भी काम में मन नहीं लगता है और इसी वजह में किसी भी काम को अक्सर बीच में छोड़ दिया करता हूँ क्योंकि मेरा मन भटकने लगता है और मैं वो नहीं कर पाता|मेरी इस समस्या का निदान कीजिये |

संत ने उसे कहा रात का इन्तजार करो फिर मैं तुम्हे तुम्हारी समस्या से मुक्ति दिला दूंगा | रात हो आई और संत उस व्यक्ति को अपने साथ लेकर एक झील के किनारे गया | चांदनी रात थी संत ने उस व्यक्ति से कहा देखो एक ये चाँद है जो मुक्त आसमान में है और एक ये चाँद है जो झील अपने हृदय में लेकर बैठी है |

तुम्हारा मन भी इसी झील की तरह है तुम अपना ज्ञान लेकर इस झील की तरह अपने मन में खुद को ज्ञानी समझ रहे हो जबकि ये सिर्फ भ्रम है ठीक उसी तरह जैसे की चाँद की ये परछाई झील के अंदर हम देख रहा है जबकि ये परिबिम्ब आकाश में मुक्त और चमक रहे चाँद की बराबरी कैसे कर सकती है क्योंकि ये मात्र एक भ्रम है |

झील का चंद्रमा पानी में कंकड़ पत्थर गिरने पर हिलने लगता है उसी तरह तुम्हारा मन भी पानी की तरह डोलने लगता है और तुम्हारा ज्ञान तुम्हारे किसी काम में नहीं आता | जबकि तुम्हे ये करना चाहिए कि तुम्हारे पास जो अर्जित ज्ञान है उसे व्यव्हार में लाना चाहिए | अपने ज्ञान और विवेक को जीवन में नियमानुसार प्रयोग में लाना होगा तभी तुम जिन्दगी के कोई लक्ष्य को हासिल कर पाओगे |

व्यक्ति संत का आशय समझ गया और दृद्ध निश्चयी होकर जिन्दगी में खुद में बदलाव करने में लग गया |