Home विचार प्रवाह मृत्यु : एक क्रूरतम सत्य – mrityu ek satya

मृत्यु : एक क्रूरतम सत्य – mrityu ek satya

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mrityu ek satya  – मृत्यु क्या है ? मुझे लगता है कि ये किसी जीवन के प्रक्रिया करने की शक्ति का समाप्त होना ही है और ये पूरी पूरी निष्पक्ष है क्योकि हर किसी को इस से गुजरना ही है चाहे जीवन स्तर कैसा भी क्यों न हो और चाहे सामाजिक तौर पर हमने उसे कई तरह से परिभाषित किया हो आधार चाहे जो भी भाषायी ,जातिगत,सम्पत्ति या फिर जो भी कुछ हो ,समय असमय उसे इसे गुजरना ही है और ये सर्वविदित है  लेकिन फिर भी अक्सर ऐसा होता है जब हमे इस अनंत सत्य को स्वीकारने में बड़ी मुश्किल आती है….. क्योंकि ऐसा मेने भी महसूस किया है अक्सर ऐसा होता है कि मुझे पता पड़ता है या फिर जेसे हम सुनते या देखते है आपने आस पास कि अमुक बंदा नहीं रहा या ऐसा कुछ जिसे हम केवल उसके नाम से ही जानते है काम से या उसके साथ से नहीं तो हमे जरा भी देर या मुश्किल नहीं आती इसे सहज स्वीकार करने में और हम इसे एक प्राकृतिक दुखदायी घटना लेकिन न टालने वाली प्रक्रिया  मानकर सहज हो जाते है और हमारे कार्यों पर इसका कोई प्रतिकूल फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर ऐसा हो कि आप किसी को उसके काम से जानते है तो बात थोड़ी अलग है लेकिन अगर आप किसी को उसके साथ से जानते हो तो मायने ही बदल जाते है  आपके लिए, परिस्थिति ऐसी होती है जेसी घडी की समय के साथ बेईमानी । क्योकि बेहद मुश्किल होता है किसी मानस पटल पर अंकित उस छवि के अस्तित्व को नकारना और सच में अगर आप कोशिश भी करते है तो उस से जुडी हर चीज़ आपको ये नहीं करने देती खैर जो भी हो यह एक अनंत सत्य है जिसे हमे स्वीकारना ही है क्योकि हम इसके लिए बाध्य है और वो इसलिए क्योकि हमारे पास विकल्प के लिए कुछ भी नहीं है |

मेरे गैर आत्मीय मित्र :स्व. अजय जाखड़ को समर्पित  |

 

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