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अपना घर एक कहानी – My dream house in hindi

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My dream house in hindi – एक बुजुर्ग बढ़ई अपने काम में बहुत माहिर था | उसके बनाये गये उत्पादों की दूर दूर तक मांग रहती थी इसलिए वो बहुत ख्यातिप्राप्त भी था |

एक दिन उसने सोचा कि उसने जीवन भर कम किया है इसलिए क्यों न बाकि कि जिन्दगी आराम से गुजारी जाये यही सोचकर वो अपने ठेकेदार के पास गया और उस से विनय की की महोदय मेने बहुत काम कर लिया है इसलिए मैं अब अपनी बाकी की जिन्दगी बिना भागदौड़ और आराम से पूजा पाठ करते हुए बिताना चाहता हूँ | इसलिए आप मुझे काम छोड़ने कि अनुमति दे तो आपकी बड़ी कृपा होगी |

ठेकेदार बढ़ई को बहुत मानता था और उसके काम से वो बेहद खुश भी था इसलिए उसे ये सुनकर बहुत दुःख हुआ लेकिन जब उसने देखा कि बढ़ई ने जाने का मन बना लिया है तो उसने कहा की चलिए कोई बात नहीं है और मुझे अफ़सोस है कि मेरा सबसे अनुभवी कारीगर मेरे साथ अब नहीं रहेगा |

इसलिए मेरी एक विनती है आप जाते जाते मेरे लिए एक मकान और बना दे तो मुझे बेहद ख़ुशी होगी | इस पर बढ़ई के लिए थोड़ी मुश्किल तो हुई लेकिन वो ठेकदार को मना भी नहीं कर सकता था लेकिन चूँकि वो काम छोड़ने का मन पहले ही बना चुका था तो उसने अनमने भाव से उसे हाँ कहदी |

उसके मन में ये बात थी कि चलो कोई बात नहीं ये आखिरी ही काम है सो ये भी सही उसके बाद तो मुझे कोई काम नहीं होगा | इस सोच के चलते वो काम में थोडा आलसी और लापरवाह भी हो गया | पहले जंहा वो सावधानी से लकड़ियाँ चुनता और काटा करता था वन्ही अब वो बड़ा आलसी और लापरवाही तरीके से ये करने लगा |

अब उसने कामचलाऊ ढंग से ये बना दिया तो कम खत्म करके जब वो ठेकेदार के पास गया और उस से विदा मांगी तो उस पर ठेकेदार ने कहा आप जा सकते है लेकिन अब आपको आपके पुराने घर में जाने की जरुरत नहीं है आपने जो अभी अभी मकान बनाया है मैं उसे आपको भेंट करता हूँ यह सुनकर बढ़ई स्तब्ध रह गया |

मन ही मन वो सोचने लगा पूरी जिन्दगी लोगो के रहने के लिए एक से एक सुंदर घर बनाये और जो मुझे मिलना था वो मेने इतना घटिया बना दिया | काश मेने इसे भी पूरी मेहनत से बनाया होता तो आज मेरे पास भी रहने को एक उम्दा घर होता |

My dream house in hindi