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बिना अकल के नक़ल – Nakal Without akal Story

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Nakal Without akal – एक बनिया था बिलकुल भोला और वह किसी गाँव के बीच मैं अपनी छोटी सी दुकान चलाता था जो उसे बनता उसी से उसका घर चलता था एक रात वो देरी से अपनी दुकान को बंद करके घर जा रहा था | तो रस्ते में उसे कुछ चोर मिले | बनिए ने उन से पूछा की भाई लोगो इतनी रात में कन्हा जा रहे हो |

इस पर चोरो ने कहा ‘भाई हम सौदागर है माल खरीदने जा रहे है ‘ बनिए ने कहा अब तो रात का एक पहर हो गया है अब कौनसा माल खरीदने जा रहे हो | अच्छा छोड़ो ये बताओ माल नकद खरीदोगे ये उधार इस पर चोरो ने कहा भाई ‘पैसे तो देने ही नहीं होते है |’ बनिया बोला ऐसा कौनसा पेशा है जिसमे बिना पेसे माल खरीदा जाता है | कुछ सोचकर बनिया बोला अच्छा भाई आप मुझे भी अपने साथ लेलो इस पर चोर बोले ‘चलिए ! आपका भी फायदा हो जायेगा ‘ इस पर बनिए ने कहा मुझे इस पेशे की कोई जानकारी नहीं है आप मुझे बता तो दीजिये ये धंधा किया केसे जाता है | इस पर चोर बोले एक कागज पर लिख लो हम बताते है न आपको |

बनिए ने कागज पर लिखना शुरू किया | चोर बोले लिखो ‘किसी के घर के पिछवाड़े ‘ बनिया ने लिखा चोर कहने लगे अब लिखो ‘चुपचाप सेंध लगाना ‘ बनिया कहने लगा लिख दिया | चोर बोले ‘दबें पांव घर में घुसना जो भी हो सब इकठ्ठा कर लेना ‘ बनिये ने पूछा आगे तो चोर बोले ‘न मकान मालिक से पूछना और न ही पेसे देना सब समेट कर अपने घर ले आना’| बनिए ने सब लिख लिया और कागज को अपनी जेब में डाल लिया |

सब चोरी करने निकले चोर एक घर में चोरी करने घुसे और बनिया दुसरे घर में | बनिया दबे पांव घर पे पिछवाडे से अंदर गया और सब सो रहे थे इसलिए अंदर तक चला गया और जाकर बड़ी बेफिक्री से माल बटोरने लगा इतने में उसके हाथ से एक बर्तन गिर गया और सब घरवाले जाग गये और घर में चोर घुसा देखकर उसे पीटने लगे | बनिया जोर जोर से चिल्लाने लगा कि” ऐसा तो इसमें लिखा नहीं है यंहा तो सब उल्टा हो रहा है |” सब उसे मारना छोड़ पूछने लगे “क्या बकवास कर रहा है ” इस पर बनिये ने जेब से कागज निकालकर दिखाया तो सब को बात समझ आ गयी और उसे धक्के देकर घर से बाहर किया |