Home General Knowledge नैनोटेक्नोलॉजी का इतिहास क्या है जानिए

नैनोटेक्नोलॉजी का इतिहास क्या है जानिए

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Nanotechnology के बारे में हम पिछली पोस्ट में बात कर चुके है और यह भी कि क्यूँ पुराने समय में यह इतनी विकसित नहीं हो पायी जितना अभी इस बारे में शोध कार्य चल रहे है और साथ ही कई तरह के अनुप्रयोग किये जा रहे है | नैनो तकनीक का उपयोग अभी सफलतापूर्वक उर्वरक , कंप्यूटरस और मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में किया जा रहा है | इस पोस्ट में हम Nanotechnology history के बारे में जानेंगे कि कैसे इसका सामान्य जिन्दगी में बहुत पहले से उपयोग होता रहा है तो चलिए बात करते है –

Nanotechnology history in hindi

इस बारे में सबसे पहले नंबर आता है छोटे से देश रोम का जिसमे चौथी शताब्दी में कांच के बर्तनों को आकर्षक बनाने के लिए उन पर सोने और चांदी के नैनो आकार के कणों का उपयोग किया जाता था और चूँकि आप जानते है कि पदार्थ के नैनो आकार की अवस्था वह अवस्था होती है जिसमे वह अपने मूल पदार्थ से भिन्न गुण रखता है जैसे कि रंग , क्रियाशीलता और किसी अन्य प्रकार के पदार्थ से व्यवहार के मामले में |

Nanotechnology history in hindi
Nanotechnology history in hindi

Nanotechnology history की बात करें तो सबसे सिम्पल उदाहरण है काजल जिसका सदियों से सौन्दर्य और health की reasons की वजह से उपयोग होता रहा है और आपको पता है काजल के पारम्परिक विधि क्या है ? यह असल में तेल या घी या तेल के अपूर्ण दहन की वजह से ऐसा होता है क्योंकि सरसों के तेल या घी के जलते दीपक के उपर जब धातु के बर्तन को कुछ ऊँचाई पर रख दिया जाता है तो तेल या घी का अपूर्ण दहन होता है और बनने वाले कार्बन के अंदर नैनो tubes की मात्रा अधिकता से होती है इस प्रकार बनने वाले कार्बन में से एक प्रतिशन भाग जो है वो नैनो कार्बन के कणों से मिलकर बना होता है | नैनो टेक्नोलॉजी के बारे में अधिक जानकारी के लिए यंहा क्लिक करें |

एक और उदाहरण की बात करे तो जापान के अंदर एक मध्यकाल में समुराई वर्ग के योद्धा थे जिनकी तलवारे बड़ी महशूर होती थी क्योंकि वो बहुत अधिक तेज धार वाली और मजबूत हुआ करती थी वजह थी उनके बनाने का तरीका बड़ा अलग हुआ करता था जिस से धातु बहुत अधिक मजबूत और धारदार हो जाती थी | इसे बनाने के लिए forge and fold नाम की तकनीक का उपयोग किया जाता था जिसमे धातू को बहुत अधिक ताप पर गर्म करने के बाद उसे fold करके फिर पीटा जाता था और ऐसे में बार बार इसी क्रिया को दोहराने की वजह से वो बहुत अधिक पतली हो जाती थी क्योंकि धातु के कण जो है बेहद पास पास हो जाते थे जिस से मजबूती के साथ साथ धार भी तेज हो जाती थी | ऐसी तलवार की सतह की मोटाई जो है वो करीब 50 नैनोमीटर हो जाती थी |

भारत में भी Nanotechnology history काफी उन्नत रही है क्योंकि हमारे यंहा बनने वाली बनारसी साडी में बहुत अधिक पतले सोने के तार का इस्तेमाल रेशे के साथ साड़ी बनाने के लिए किया जाता रहा है और ऐसे में साड़ी और भी अधिक आकर्षक हो जाती थी |

आप इसे ऐसे भी समझ सकते है कि नैनो तकनीक से जुड़ा विज्ञान जो है वो बहुत अधिक नया नहीं है क्योंकि हमारे पूर्वज भी बड़े समय से इसका उपयोग अपने दैनिक जीवन से जुडी चीजो में करते आ रहे है लेकिन बस उसे अधिक गहराई से समझा नहीं गया था और जैसा कि हमने हमारी पिछली पोस्ट में पढ़ा कि पहले ऐसे साधन भी नहीं थे जिनसे बहुत अधिक जानकारी नैनो तकनीक के बारे में जुटाना संभव हो पाता जिसकी वजह से हम इस क्षेत्र में बहुत अधिक कुछ नहीं कर पाए लेकिन अब ये संभव है कि हम Nanotechnology history में एक नया अध्याय लिखे |

तो ये है Nanotechnology history in hindi और इस बारे में और अधिक जानकरी के लिए आप नीचे कमेन्ट कर सकते है साथ ही hindi में अपडेट पाने के लिए आप हमसे गूगल और फेसबुक पर भी जुड़ सकते है और ईमेल के जरिये hindi post पाने के लिए आप हमसे फ्री ईमेल सब्सक्रिप्शन भी ले सकते है |

Image Source – Demo Pic