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स्त्री की याचना – Nari in hindi story

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Nari in hindi story- एक प्रतापी राजा था | जो बहुत ही यश प्राप्त और परम शक्तिशाली था | उसका नाम नन्द था और उसके मंत्री का नाम वर रूचि था | वह सभी शास्त्रों का ज्ञाता और विचारक था | वह अपनी पत्नी को बहुत चाहता था एक बार उसका अपनी पत्नी के किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया | पत्नी नाराज हो गयी और अनशन करके प्राण देने पर तुल गयी | वर रूचि ने अपने पत्नी को बहुत मनाया पर वह नहीं मानी | अंत: में उसने कहा कि बताओ मैं तुम्हारे लिए ऐसा क्या करूँ कि तुम्हारी नाराजगी दूर हो | इस पर पत्नी ने कहा तुम अपना सर मुंडन करवाओ और उसके बाद मेरे चरणों में प्रणाम करो | वर रूचि ने ऐसा ही किया | उसकी पत्नी प्रसन्न हो गयी |

इसी प्रकार एक बार राजा नन्द की पत्नी भी राजा से क्रोधित होकर कलह मचाने लगी | राजा भी अपनी पटरानी को बहुत प्रेम करता था तो उसने उसे मनाने के सारे यत्न किये | तो फिर हार कर पुछा कि बताओ मैं तुम्हे प्रसन्न करने के लिए क्या करूँ | इस पर रानी ने कहा कि” तुम घोड़े की तरह अपने मुह में लगाम लगाओ फिर मैं तुम्हारी सवारी करुँगी और फिर तुम घोड़े की तरह हिनहिनाना |”  राजा नन्द ने विवश होकर अपनी पत्नी को प्रसन्न करने के लिए ऐसा ही किया |

अगले दिन राजसभा में नन्द में महामंत्री के मुंडन को देखकर पुछा ” अरे महामंत्री तुमने किस पर्व पर यह मुंडन करवा लिया ?” मंत्री भी चतुर था  उसने जवाब दिया ” महाराज स्त्री की याचना पर तो लोग घोड़े की तरह हिनहिनाने लगते है तो केश मुंडन तो कुछ भी नहीं है |” इस पर राजा लज्जित होकर चुप हो गया |