Home General Knowledge नक्सली हिंसा क्या है और क्यों है ये समस्या जानिए ?

नक्सली हिंसा क्या है और क्यों है ये समस्या जानिए ?

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Naxalite problem के बारे में बात करें तो आये दिन कुछ न कुछ ऐसी हिंसक घटनाएं होती रहती है जिनका नाम नक्सली हिंसा से जोड़ा जाता है या जिन्हें नक्सलवाद का एक देश विरोधी चेहरा कहा जा सकता है साथ ही इसे माओवाद भी कहा जाता है और इस तरह की विचारधारा में चलने वाले लोगो को माओवादी और हाल ही में CRPF के जवानों पर भी सुकमा में नक्सली का एक हमला हुआ था जिसमे सुकमा ज़िले में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) के कम से कम 25 जवान मारे गए और कुछ घायल भी हो गये थे तो चलिए Naxalite problem क्या है इसी बारे में थोड़ी और जानकारी प्राप्त करते है –

Naxalite problem in hindi

Naxalite या Naxal की शुरूआत के बारे में बात करें तो जब से देश आजाद हुआ है तब से लेकर आजतक बहुत सा बदलाव आ गया है लेकिन यह बदलाव भी कंही न कंही राजनीतिक हितों से सरोबार रहा है और इसी वजह से किसी जगह बहुत अधिक विकास हो गया और सभी तरह से संसाधन लोगो को मिले है और कुछ ऐसी जगहें भी देश में है जन्हा आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी है | नक्सलियों की उत्पति का मुख्य कारण भी यही है कि जब रोटी, कपड़ा, मकान, सड़क, स्‍वास्‍थ्‍य और रोजगार जैसी सुविधाएँ अगर लोगो को मिलेगी नहीं तो कुछ न कुछ लोग इस बारे में करेंगे ही और यही उन इलाकों में रहने वाले लोगो के साथ हुआ और वो लोकतान्त्रिक व्यवस्था और सत्ता के खिलाफ बागी हो गये और न केवल बागी हो गये बल्कि हिंसक तौर पर बागी हो गये और यही से Naxalite problem शुरू होती है |Naxalite problem In hindi

Naxalite problem की थोड़ी और गहनता से बात करें तो इसकी शुरुआत  प. बंगाल के छोटे से गांव नक्‍सलबाड़ी से हुई। भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के चारू मुजुमदार और कानू सान्‍याल ने 1967 में एक सशस्‍त्र आंदोलन को नक्‍सलबाड़ी से शुरू किया इसलिए इसका नाम नक्‍सलवाद हो गया और ये दोनों ही मुख्य रूप से इस आन्दोलन के जनक माने जाते है | चारू मजूमदार सिक्किम के सिलीगुड़ी के रहने वाले थे और ये आँध्रप्रदेश के तेलंगाना के आन्दोलन के चलते व्यवस्था से बागी हो गये थे जिसकी वजह से उन्हें 1962 में जेल जाना पड़ा और जेल के अंदर ही इनकी मुलाकात कानू से हुई जिनका जन्म दार्जिलिंग में हुआ था लेकिन और ये पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री विधानचन्द्र राय को काला झंडा दिखने के आरोप में जेल गये हुए थे | इन्होने ही दोनों में मिलकर 1967 में सशस्‍त्र आंदोलन को शुरू किया जो बाद में Naxalite problem के रूप में देश के सामने आया |

हालाँकि चारू मुजुमदार की मृत्‍यु 1972 में हुई, जबकि कानू सान्‍याल ने 23 मार्च 2010 को फांसी लगा ली। इन दोनों की मौत के बाद चूँकि आन्दोलन को सही दिशा नहीं मिली और ना ही आज भी इसकी छवि कोई समस्याओं और सुविधाओं के लिए या अपने हक़ के लिए लड़ते कुछ लोगो के धड़े की है बल्कि देश के कई राज्‍य आज भी लंबे समय से इसे झेल रहे हैं जिनमे आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड और बिहार शामिल है और Naxalite problem की वजह से बेगुनाह लोग भी अपनी जान से हाथ धोते है जिसमे सेना और सरकार के लोग भी इसमें शामिल है जो कि एक बड़ा मुद्दा है | इसके विपक्ष में बात करने वाले लोगो के लिए तो यह एक समस्या की तरह औरु पक्ष में बात करने वाले या जो लोग नक्सली लोगो से सहानुभूति रखते है वो लोग ये मानते है कि अगर आज के समय में किसी विकसित क्षेत्र के लोगो को अगर मूलभूत सुविधायों से वंचित कर दिया जाए तो वो लोग भी सिस्टम के खिलाफ बागी हो जायेंगे फिर ये लोग तो भटके हुए है जिनके बारे में सरकार को कोई ठोस कदम उठाकर चीजे ठीक करने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए |

तो ये है Naxalite problem in hindi और इस बारे में अधिक जानकारी या सलाह के लिए आप हमे ईमेल कर सकते है और हमसे hindi updates पाने के लिए आप हमे फेसबुक पर फॉलो कर सकते है या फिर नीचे दिए गये घंटे के निशान पर भी क्लिक कर सकते है |

Image Source – demo pic