Home Banking Knowledge एनपीए क्यूँ है देश के लिए खतरा जानिए

एनपीए क्यूँ है देश के लिए खतरा जानिए

SHARE

NPA एक ऐसा मुद्दा है जिसे बार बार उठाया जाता रहा है और आप सुनते है कि यह भी हमारी इकॉनमी और banks के लिए सिर दर्द बना हुआ है और इसके बारे में हर बार जब भी इकॉनमी की बात होती है कुछ न कुछ ठोस कदम उठाने की बात होती है तो चलिए जानते है कि यह npa क्या है और क्यूँ यह देश के लिए और economy के लिए चिंता का विषय बना हुआ है –

npa in banks in hindi

असल में npa को Full Form में Non-performing asset कहा जा सकता है और अगर साधारण भाषा में बात करें तो यह ऐसी सम्पति होती है जिसका देश की अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं होता है और npa in banks की बात करें तो यह loans के बारे में होता है और भी बड़े loans के बारे में क्योंकि छोटे लोग अगर loan लेते है तो बैंक्स उनसे वसूली के लिए उनका खून पीने तक तैयार हो जाते है लेकिन बड़े loan के मामले में ऐसा नहीं होता है और इसके बहुत से कारण और दबाव होते है जिसकी वजह से bank ऐसा कर पाने में अक्षम होते है | npa-in-hindi

Banks के लिए एनपीए को साधारण तरीके से हम इस तरह से समझ सकते है कि अगर bank से कोई बड़ा loan लेता है और किसी भी कारण से उसे वसूल पाने में अक्षम होता है तो यह एनपीए की श्रेणी में आ जाता है और इसे bad loans भी कह सकते है क्योंकि उन्हें रिकवर करने की सम्भावना बेहद कम होती है | इसलिए “ ऐसे loan जिनके डिफाल्ट होने की अधिकाधिक सम्भावना होता है वह npa में आते है “| यह निम्न वजहों से हो सकता है –

  • Bank की loan देने की प्रक्रिया में खामी होना |
  • कोई बैंकिंग आपदा |
  • जिस बिजनेस या कंपनी के loan लिया है उसका दिवालिया हो जाना |

और इन सब के प्रभाव सभी लोगो और देश की अर्थव्यवस्था में पड़ता है क्योंकि –

  • अगर एनपीए बढ़ जाता है तो इस से देश की अर्थव्यवस्था पर खराब असर पड़ता है |
  • Bank के शेयर होल्डर्स को भी इस से नुकसान होता है |
  • इस का प्रभाव बैंक्स के मुनाफे पर भी पड़ता है |

हालाँकि हमारे देश में भी बैंकिंग व्यवस्था में npa एक अहम् मुद्दा है जिस से पार पाने के लिए कोशिशे जारी है | तो यह है npa in banks in hindi और अधिक जानकारी के लिए आप नीचे कमेन्ट कर सकते है या हमसे hindi updat पाने के लिए आप हमसे फेसबुक पर जुड़ सकते है या ईमेल सब्सक्रिप्शन भी ले सकते है |

Image Source –