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एक वर्ष में छोड़ा कि नहीं – Old behavior Story

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Old behavior Story एक बार एक सेठ था तो निरंतर एक वर्ष तक चारो धामों की यात्रा करके लौटा | उसने पूरे गाँव को अपने एक वर्ष की उपलब्धि के बखान करने के लिए प्रीतिभोज का आयोजन किया | सेठ की उपलब्धि यह थी कि वो अपने अंदर के क्रोध और अहंकार को चारों धामों में त्याग आये थे |

सेठ का एक नौकर था जो बड़ा ही अधिक बुद्धिमान था इसलिए भोज के आयोजन से ही वो जान गया था कि सेठ अभी अहंकार से मुक्त नहीं हुआ है | किन्तु अभी उसके क्रोध की परीक्षा लेनी थी | इसलिए उसने भरे समाज में सेठ से ये पुछा की सेठ जी ये बताओ आप क्या क्या छोड़ कर आये हो | तो सेठ जी ने बड़े उत्साह से कहा ‘मैं क्रोध और अहंकार त्याग कर आया हूँ |’ फिर कुछ देर बाद नौकर ने वही प्रश्न किया | सेठ जी का वही उत्तर था | बार बार एक ही प्रश्न पूछने पर सेठ आपे से बाहर हो गया और गुस्से में नौकर से बोला ‘दो टके का नौकर मेरा दिया हुआ खाता है और मेरा ही मजाक बना रहा है |’ बस इतनी ही देर थी कुछ ही पलों में नौकर ने भरे समाज के सामने सेठ के क्रोध व अहंकार की पोल खोलकर रख दी | सेठ भरे समाज में अपना लज्जित चेहरा लेकर रह गया | इसलिए कहा गया है हमे दिखावे से अधिक अपने कर्तव्य बोध पर ध्यान देना चाहिए |