Home Short Stories अथिति देव है -Old time story in hindi

अथिति देव है -Old time story in hindi

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Old time story in hindi – एक जंगल में एक बहेलिया घूमा करता था वह पशु पक्षियों को पकड़ता और उन्हें मार देता था | कोई भी उसका मित्र नहीं था इसलिए वह हमेशा जाल डंडा व पिंजरा लेकर जंगल में घूमा करता था | एक दिन उसने एक कबूतरी को अपने पिंजरे में बंदी बना लिया | इसी बीच घोर अँधेरा छा गया और मूसलाधार बारिश होने लगी | इस पर बहेलिये ने एक पेड़ के नीचे शरण ली और ऊँचे स्वर में बोला जो भी यंहा रहता हो मैं उसकी शरण में हूँ | ऊपर पेड़ पर एक कबूतर और कबूतरी का घोंसला था | कबूतर अपनी कबूतरी का इंतज़ार कर रहा था और सोचने लगा कि वो न हो इस भयंकर बारिश में फसकर उसकी मृत्यु हो गयी होगी | कबूतर उसके वियोग में विलाप कर रहा था तो बहेलिये के पिंजरे में बंद कबूतरी बोल उठी कि विलाप मत करो मैं यंहा हूँ और यह बहेलिया इस वक़्त मुसीबत में तुम्हारी शरण में आया है और हमारा मेहमान है इसलिए तुम इसकी सेवा करो इस से इसलिए घृणा मत करो कि इसने मुझे पिंजरे में कैद कर रखा है |

इस पर कबूतर ने उस बहेलिये से कहा भाई मैं तुम्हारी क्या सेवा कर सकता हूँ तो बहेलिये ने कहा मुझे ठण्ड लग रही है और भूख भी इस पर कबूतर कंही से जलती हुई लकड़ी  ले आया और सूखे पत्तों के ढेर पर गिराकर उसने आग जला दी और कहने लगा तुम्हारी भूख के लिए मैं क्या उपाय करूं और जो शरीर अथिति की सेवा में काम न आ सके उसे धारण करने का क्या लाभ | कबूतर अपनी बात करता रहा पर बहेलिये द्वारा कबूतरी को बंदी बनाये जाने के विषय में उसकी निंदा नहीं की | थोड़ी देर बाद कबूतर आग के इर्द गिर्द घूमता हूँ आग में कूद गया | बहेलिये का मन बदल गया उसने सोचा एक पक्षी ने मेरी भूख के लिए खुद को बलिदान कर दिया और उसने कबूतरी को आजाद कर अपना डंडा जाल और पिंजरा फेंक दिया | कबूतरी भी पति का वियोग सहन नहीं कर पायी और खुद उस आग में कूद कर मर गयी | इस तरह दोनों पक्षियों ने घर में अथिति की भूख मिटाने के लिए खुद का बलिदान कर दिया |

moral : कहा गया है घर में आये अथिति की सेवा सभी प्रकार के कष्ट उठाकर भी करनी चाहिए |