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हम ‘सबको’ एक दिन जाना ही है -osho hindi discourses

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osho hindi discourses – एक दिन किसी ने ओशो से प्रश्न किया कि ” मेरी बहन का देहांत हो गया है और उसके बाद मैं बहुत दुखी और परेशान महसूस करता हूँ तो मैं क्या करूँ कि मेरी परेशानी दूर हो |”

ओशो : जाना है और सबको जाना है | हम सब पंक्तिबद्ध होकर जाने को तेयार खड़े है | कब किसका बुलावा आ जाये | बहन गयी तुम्हारी तो चोट लगी तुम पर | चोट इसलिए कि तुमने यह मानकर जिदगी चलायी कि बहन तुम्हारी कभी जाएगी नहीं |बहन के जाने से चोट नहीं लगी ,तुम्हारी मान्यता भ्रांत थी ,मान्यता के टूटने से चोट लगी |काश तुमने जाना ही होता कि सबको जाना है तो तुम्हे चोट नहीं लगती |तुमने झूटी मान्यता बना रखी थी कि बहन कभी नहीं जाएगी |किसी अचेतन में तुम चुपचाप इस भाव को पालते पोसते रहे कि बहन कभी नहीं जाएगी | इतनी प्यारी बहन कंही जाती है |

लेकिन सबको जाना है | अब तुम सोच रहे हो कि बहन के जाने के बाद तुम दुखी हो ,तो फिर गलत सोच रहे हो | तुम्हारी मान्यता उखड गयी इसलिए तुम दुखी हो |यह बहन का जाना तुम्हारे सारे तारतम्य को तोड़ गया इसलिए दुखी हो |अब भी सोचो ,अब भी जागो तुम्हे भी जाना है | पिता भी जायेंगे ,माता भी जाएगी मित्रो को भी जाना है सभी को जाना है | बहन तो जेसे राह दिखा गयी | धन्यवाद मानो  उसका और अनुग्रह स्वीकार करो कि अच्छा किया तू गयी और हमे चेता गयी | अब जाने की तेयारी हम करें |