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अपनी अपनी दृष्टि – Own Point of View Story Hindi

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Own Point of View  – एक धर्मात्मा ने जंगल से गाँव की और जाते हुए रस्ते पर राहगीरों के लिए एक धर्मशाला का निर्माण किया ताकि आने जाने वाले आदमी उसमे आराम कर सकते और अपनी थकान मिटा सके | लोग आते जाते रहे तो दरबान कमरा छोड़ने से पहले हर किसी से पूछता था कि आपको यंहा रहकर कैसा लगा और बनाने वाले ने इसे किस उद्देश्य से बनाया है |
इस पर सभी आने जाने वाले लोगो के अलग अलग विचार थे| सबने अपनी अपनी दृष्टि से धर्मशाला के निर्माण के उद्देश्य को बताया | चोरो ने कहा यंहा चोरी करके माल को गुप्त रखा जा सकता है जबकि व्यभिचारियों ने कहा यंहा बिना किसी रोक टोक के भोग विलास किया जा सकता है |
साधू संतो ने कहा कि यंहा बैठकर शांति के माहौल में मौन साधना की जा सकती है | कलाकारों ने कहा यंहा एकांत का लाभ मिलता है इसलिए हम अच्छी कलाकृति बना सकते है | जबकि विद्यार्थियों के एक दल ने कहा यह जगह अध्ययन के लिए बहुत अनुकूल है |
हर कोई आने जाने वाला अपनी दृष्टि के अनुरूप सुझाव और अपने अपने कार्यों की जानकारी देता गया |
दरबान ने निष्कर्ष निकाला कि जिसका जैसा दृष्टिकोण होता है वैसा ही व्यक्तित्व भी होता है |