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एक मूर्ख दोस्त से अच्छा एक चतुर दुश्मन होता है -Raja aur bandar ki kahani

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Raja aur Bandar ki Kahani – सुन्दर नगर नाम का एक राज्य था । वंहा के राजा का नाम भी सुन्दर सिंह था । एक दिन राजा के महल में एक मदारी आया उसने राजा से कहा की मेरे पास एक बंदर है जो बहुत समझदार है । सब लोग मदारी पर हस रहे थे । राजा ने कहा ” महल में ये सब खेल नहीं होता ” । महल में तो प्रजा की समस्या सुनी जाती है और उसका समाधान किया जाता है । मदारी ने राजा से एक बार खेल देखने को कहा । राजा ने सोचा मदारी इतने विश्वाश से कह रहा है तो इसको एक बार मौका देना चाहिए । राजा ने मदारी को खेल दिखने का आदेश दिया । मदारी खुश होकर खेल दिखने लगा । बंदर मदारी के सारे आदेश मानता था । मदारी के कहने पर बंदर ने राजा को गुलाब का फूल भेंट किया । राजा खुश हुआ और उसने बंदर को खरीदने का सोचा । राजा ने मदारी को अपने दिल की बात कही । मदारी ने सोचा अगर मैं न बोल दूँ तो राजा मुझे दंड देंगे । मदारी ने बन्दर राजा को बेच दिया । एक दिन दूसरे राज्य के राजा ने आक्रमण किया । अंतिम वक़्त पर बन्दे ने राजा को बचाया और राजा बंदर से प्रभावित हुए और परिणामस्वरूप राजा ने बंदर को अपना दोस्त माना और बंदर को अपना अंगरक्षक बना दिया और मंत्रिमंडल ने इसे राजा की सबसे बड़ी भूल कहा किन्तु राजा ने किसी की भी एक नहीं सुनी । एक दिन राजा सो रहे थे और राजा के मुह पर एक मच्छर बैठा था । बन्दर ने तलवार से मच्छर पर वार किया तो मच्छर तो उड़ गया और राजा की जान चली गयी ।

शिक्षा : एक मूर्ख दोस्त से अच्छा एक चतुर दुश्मन होता है |