Home Hindi History रानी पद्मावती के जौहर की ऐतिहासिक कहानी

रानी पद्मावती के जौहर की ऐतिहासिक कहानी

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Rani Padmavati (रानी पद्मावती) के बारे में बात करें तो अभी एक फिल्म भी इस घटना पर बनी है जिस पर आये दिन विवाद हुए है हालाँकि हम विवाद पे बात नहीं करके उस ऐतिहासिक घटना की तरफ बढ़ते है जिसकी वजह से इतिहास के कुछ बीते पलों के बारे में हम कुछ जानने के बारे में सोचते है | हमारे इतिहास में बहुत सी ऐसी घटनाएं हुई है जिन्होंने जनमानस के मन पर अपनी एक अलग छाप छोडी है यही वजह है कि आज भी हम उन्हें याद करके प्रेरणा लेते है और कुछ ऐसी है जिन्हें याद करके हम उन गलतियों को नहीं करने के बारे में सोचते है जो हमारे पूर्वजों ने की | हालाँकि इन्ही कुछ घटनाओं ने हमारे वर्तमान को जो उस समय का भविष्य था उसे आकार दिया है और इसमें से एक घटना है rani padmavati johar की जिसमे उन्होंने दुश्मनों के हाथ में पड़ जाने से अधिक खुद के सम्मान की रक्षा करते हुए जौहर करने को अधिक महत्व दिया तो चलिए इसी बारे में कुछ बात करते है –

Rani Padmavati johar in hindi

Rani Padmavati के बारे में और उनकी सुन्दरता के बारे में बहुत से किस्से हमे इतिहास की किताबों और दस्तावेजों में मिल जाते है | उनकी सुन्दरता के लिए वह इतनी मशहूर थी कि कवियों ने उनकी सुन्दरता के विषय में बहुत सी कवितायेँ लिखी है | वह चितौड के राजा राणा रतन सिंह की पत्नी थी और श्रीलंका के एक द्वीप सिंहला के राजा की पुत्री थी | आज हम Rani Padmavati को जिस वजह से जानते है वह johar यानि की आत्मदाह और वह उन्होंने तब किया जब 1303 में अल्लाउद्दीन खिलजी नाम के एक मुस्लिम शासक ने चितौड पर हमला कर दिया था | Rani Padmavati के johar के बारे में बात करने से पहले हम उनकी जिन्दगी के बारे में थोड़ी जानकारी ले लेते है |

रानी पद्मावती की जीवनयात्रा सिंहला से शुरू होती है जो श्रीलंका के एक द्वीप है और उनके पिता गंधर्वसेन और माता चंपावती के पालन पोषण से घर में ही वह बड़ी हुई | उन्हें विवाह के लिए उन्हें पिता ने स्वयंवर रखा था जिसमे उन्होंने बहुत से हिन्दू और राजपूत राजाओ को बुलावा भेजा था और इसी स्वयंवर में चितौड के राजा रतन सिंह ने एक दूसरे राजा मलखान सिंह को हराकर स्वयंवर और Rani Padmavati का दिल जीत लिया था और उन्होंने उनसे शादी की | रतन सिंह सिसोदिया वंश के थे और उनकी पहले से ही 13 पत्नियाँ थी  लेकिन विवाह के बाद वो Rani Padmavati से बहुत प्रेम करने लगे और उनके बेहद करीब भी आ गये | ऐसा कहा जाता है कि वो रानी पद्मवती से इतने जुड़ गये थे कि उन्होंने फिर कभी दोबारा विवाह नहीं किया |

rani padmavati johar in hindi
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उनकी सभा में एक अच्छा संगीतकार था जो जादू भी जानता था और उन दिनों जादू प्रतिबंधित था और जो भी यह करता हुआ पाया जाता था उसे सजा दी जाती थी और वह कलाकार जिसका नाम ‘राघव चेतन ‘ था वह तंत्र-मंत्र करते हुए पकड़ा गया जिसकी वजह से उसे सजा के तौर पर गधे पर बैठकर पूरे राज्य में घुमाया गया और यह राघव चेतन के लिए बेहद शर्मिंदगी भरी बात थी जिसका उसने बदला लेने के लिए सोचा | इसके लिए वह दिल्ली के उस समय के सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी के पास गया और Rani Padmavati की सुन्दरता का बखान करते हुए खिलजी को चितौड पर आक्रमण करने के लिए उकसाया | खिलजी रानी को देखने की लालसा में मेहमान के तौर पर राजा ratan singh के दरबार में मेहमान के तौर पर गये और उन्होंने Rani Padmavati को देखने का निवेदन किया | उस समय राजपूत समाज में पति के अलावा किसी भी पराये पुरुष को चेहरा दिखाना परम्परा के विरुद्ध था इसलिए रानी ने उनके निवेदन को नकार दिया |

राजा रतन सिंह ने जब रानी से निवेदन किया कि अल्लाउद्दीन खिलजी मेहमान के तौर पर उनके राज्य में पधारे है जो कि एक बड़े सुल्तान है ऐसे में उनके निवेदन को मना करना ठीक नहीं होगा तो रानी ने कहा कि अगर ऐसा है तो एक शर्त पर वह यह निवेदन स्वीकार करने को तैयार है बशर्ते खिलजी उन्हें 100 दासियों और राजा रतन सिंह की उपस्थिति में आईने में देखें | खिलजी ने यह शर्त स्वीकार कर ली | जब खिलजी ने रानी को देखा तो वह मंत्रमुग्ध हो गये और उनके मन में रानी को पाने की इच्छा बलवत हो गयी |  खिलजी ने कुछ सैनिको के जोर पर रतन सिंह को अगवा कर लिया और बदले में रानी पद्मावती की मांग की लेकिन युद्ध नीति और चालाकी का परिचय देते हुए राजा रतन सिंह को कुछ विश्वासपात्र सैनिकों के दम पर छुडवा लिया जाता है जिसकी वजह से खिलजी गुस्से में आकर अपनी बड़ी सेना के साथ चितौड पर हमला कर देते है | खिलजी जब किले का मुख्य द्वार नहीं खोल पाता है तो पूरी सेना को किले को घेर लेने का आदेश देता है जिसकी वजह से किले में खाने पानी की कमी हो जाती है और राजा रतन सिंह किले का मुख्य द्वार खोल कर सैनिकों को मरते दम तक युद्ध करने का आदेश दे देते है |

लेकिन युद्ध में रतन सिंह की सेना खिलजी की विशाल सेना के सामने कमजोर पड़ने लगती है तो सेना को हारते देख Rani Padmavati johar कर लेती है | 26 अगस्त, 1303 को अपने सम्मान और शत्रु के हाथ में पड़ने से अधिक वो अपनी मर्यादा को बच्नाने को प्राथमिकता देती है और आग में आत्मदाह कर लेती है | जीवन से अधिक अपनी मर्यादा को प्राथमिकता देने की वजह से ही रानी पद्मावती को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है |

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Image Source – demo pic