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असली महात्मा – Real Monk story

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Real Monk story – एक दिन एक नदी के किनारे एक बड़े से पत्थर पर एक महात्मा बैठे हुए थे | वंहा पर एक धोबी आता था कपडे धोने के लिए और नदी के किनारे वही एकमात्र पत्थर था जंहा वह हर रोज कपडे धोया करता था |  धोबी उस दिन कपडे धोने आया तो उसने महात्मा को वंहा पर बैठे हुए देखा तो सोचा कि अभी बैठे होंगे थोड़ी देर में उठ जायेंगे तब तक मैं इन्तजार कर लेता हूँ |

बेचारे ने एक घंटे इंतज़ार किया | दो घंटे हो गये और समय बीतता गया लेकिन महात्मा वंहा से नहीं उठे तो उसने जाकर उनसे विनती की कि महात्मन मुझे कपडे धोने है तो आप थोड़ी देर के लिए यंहा से उठ जाईये | महात्मा वंहा से उठ गया और उस से थोड़ी दूरी पर बैठ गये |

पछाड़ पछाड़ कर कपडे धोने की कृपया में कुछ छींटे महात्मा पर भी पड़े | इस पर महत्मा को क्रोध आ गया और वो धोबी को गालियाँ देने लगे | फिर भी उनका मन नहीं भरा तो धोबी का डंडा लेकर उसे मारने भी लगे | तो धोबी को लगा उस से कोई भूल हो गयी तो वो हाथ जोड़कर महात्मा से क्षमा मांगने लगा कि महाराज मुझसे क्या भूल हो गयी है जो आप इतने क्रोधित हो रहे है तो महात्मा ने कहा ‘मूढ़ तुझे दिखाई नहीं देता तू गंदे छींटे मुझ पर गिरा रहा है तुझमे कोई शिष्टाचार है या नहीं है तो धोबी ने कहा गुरूजी भूल हो गयी क्षमा करें क्योंकि लोगो के कपड़ो की गंदगी निकालते निकालते मेरा ध्यान ही नहीं रहा |’ कहकर क्षमा मांगकर धोबी वंहा से चला गया तो महात्मा क्या देखते है कि धोबी की पत्थर से निकला पानी मिटटी के सम्पर्क में आकर साफ़ हो रहा है और नदी स्वच्छ होकर मिल रहा है जबकि महात्मा के कपड़ो में सीलन और बदबू फ़ैल गयी है अब महत्मा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्हें लगा धोबी ही असली महात्मा है | संयत रहकर समता के भाव से वह लोगो के कपड़ो की गंदगी दूर कर रहा था |