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चरित्र का सम्मान Respect of Character Hindi Kahani

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Respect of Character -एक बार एक राजा के पुरोहित के मन में एक सवाल आ गया कि राजा और बाकि सब लोग मुझे इतने आदर भाव से देखते है वो सम्मान मेरे ज्ञान का है या सदाचार का | कई दिनों तक यह सवाल पुरोहित को परेशान करता रहा आखिर एक दिन उसे इस सवाल के जवाब को ढूँढने की तरकीब मिल गयी | उसने राजकोष से एक सिक्का उठा लिया तो मंत्री ने ऐसा करते उसे देख लिया और सोचा कि पुरोहित ने अगर ये किया है तो जरुर कोई न कोई विशेष प्रयोजन होगा | दुसरे दिन भी यही घटना दोहराई गयी मंत्री फिर भी कुछ नहीं बोला |

तीसरे दिन पुरोहित ने राजकोष से मुट्ठीभर सिक्के उठा लिए तो मंत्री ने जाकर ये बात राजा से कही | अगले दिन जब दरबार लगा तो राजा ने पुरोहित से पूछा कि क्या मंत्री सही कह रहा है तो इस पर पुरोहित ने कहा कि -हाँ मंत्री सही कह रहे है | तो राजा ने पुरोहित को दंड सुना दिया |

इस पर पुरोहित ने बोला कि की राजन मैं चोर नहीं हूँ अपितु मैंने सिक्के इसलिए उठाये है क्योंकि मेरे मन एक विचार आया था कि ये जो आप सब लोग मुझे आदरभाव से देखते है वो मेरे ज्ञान की वजह से है या सदाचार की वजह से | यह परीक्षा हो गयी सम्मान अगर ज्ञान का होता तो आज मैं कटघरे में नहीं होता क्योंकि ज्ञान मेरे पास जितना था उतना आज भी मेरे पास सुरक्षित है लेकिन जैसे ही मेरा सदाचार खंडित हुआ मैं अपराधी बना दिया गया जो दंड योग्य है | सच है चरित्र ही सम्मान पाता है |